एमपी हाईकोर्ट का स्कूल को निर्देश: बिना मान्यता के छात्रों को दाखिला देने पर फीस वापस करें
Shahadat
3 Nov 2026 8:08 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूल द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की। स्कूल ने अपनी मान्यता के नवीनीकरण (Renewal) का आवेदन अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि संस्थान ने लापरवाही बरती है, क्योंकि उसे पता था कि उसकी मान्यता का नवीनीकरण नहीं हुआ। फिर भी उसने छात्रों को दाखिला दे दिया। [2026 LiveLaw (MP) 444]
जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने निर्देश दिया:
"याचिकाकर्ता संस्थान ने अपने कामकाज में लापरवाही बरती है। अपनी कमियों और मान्यता का नवीनीकरण न होने की जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने छात्रों को दाखिला दिया। इसलिए यह कोर्ट इस रिट याचिका को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। याचिकाकर्ता/संस्थान को निर्देश दिया जाता है कि वे छात्रों से ली गई फीस को आज से 30 दिनों के भीतर वापस कर दें।"
यह स्कूल 'बंस पाई शिक्षा एवं स्वास्थ्य समिति' नाम की एक संस्था द्वारा चलाया जा रहा था, जो 8 अक्टूबर 2007 को 'एमपी सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1973' के तहत पंजीकृत हुई। स्कूल ने 15 दिसंबर 2025 को 'डायरेक्टरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन' के संयुक्त निदेशक (Joint Director) के पास सत्र 2026-27 के लिए मान्यता नवीनीकरण हेतु ऑनलाइन आवेदन किया। लेकिन, जरूरी शर्तें पूरी न करने के कारण इस आवेदन को खारिज कर दिया गया।
इसके बाद स्कूल ने 6 मार्च 2026 को संयुक्त निदेशक के समक्ष अपील दायर की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। स्कूल ने दूसरी अपील भी दायर की, लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया।
स्कूल के वकील ने तर्क दिया कि मान्यता नवीनीकरण का आवेदन खारिज होने से, जिन छात्रों ने दाखिला लिया है, उनका करियर खतरे में पड़ गया। उन्होंने WP 21557 (2022) का भी हवाला दिया, जिसमें इस कोर्ट ने अंतरिम राहत दी थी। स्कूल ने कहा कि उसने सत्र के लिए संबद्धता शुल्क (Affiliation Fees) पहले ही जमा किया और वह सभी लागू शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है।
कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि मान्यता नवीनीकरण न होने की जानकारी होने के बावजूद स्कूल ने छात्रों को दाखिला क्यों दिया। याचिकाकर्ता के वकील इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे पता चले कि दूसरी अपीलीय अथॉरिटी ने उनकी अपील खारिज कर दी थी।
अदालत ने छात्रों को दाखिला देने के मामले में स्कूल के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई।
अदालत ने कहा,
"स्कूल छात्रों को दाखिला देने की स्थिति में नहीं था, फिर भी उसने बड़ी संख्या में छात्रों को दाखिला दे दिया और उनसे फीस भी वसूल ली, जिसके लिए याचिकाकर्ता संस्थान पात्र नहीं था।"
इसलिए अदालत ने याचिका खारिज की और स्कूल को आदेश दिया कि वह दाखिला लिए गए छात्रों से ली गई फीस को आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर वापस करे।
अदालत ने आगे यह भी निर्देश दिया:
"यह अदालत प्रतिवादी नंबर 2 (आयुक्त, लोक शिक्षण निदेशालय, भोपाल) और प्रतिवादी नंबर 3 (संयुक्त निदेशक, लोक शिक्षण निदेशालय, नर्मदापुरम संभाग, नर्मदापुरम) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देना उचित समझती है कि याचिकाकर्ता संस्थान में पढ़ रहे छात्रों के करियर पर कोई बुरा असर न पड़े। उन्हें तुरंत ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में हो जाए और उनके परीक्षा फॉर्म भी सही तरीके से भर दिए जाएं।"
Case Title : Shri Guru Sahab Carrier School v State of MP

