मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत: खेद जताने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामला बंद किया
Shahadat
26 Jun 2026 9:18 AM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि का मामला बंद किया। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांधी ने 2018 में एक चुनावी रैली के दौरान सिंह के खिलाफ झूठे और मानहानिपूर्ण बयान दिए। [2026 LiveLaw (MP) 235]
गांधी ने ट्रायल कोर्ट के 2024 के उस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया, जिसमें मानहानि के मामले का संज्ञान लिया गया और उन्हें समन जारी किया गया।
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने अपने आदेश में गांधी की ओर से पेश सीनियर वकील की दलील का जिक्र किया। वकील ने बताया कि गांधी ने खेद व्यक्त किया, जिसे प्रतिवादी (सिंह) की ओर से लिखित जवाब में स्वीकार कर लिया गया। साथ ही प्रतिवादी इस बात पर भी सहमत थे कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों के समक्ष कार्यवाही बंद की जा सकती है।
सिंह की ओर से पेश वकील ने कहा कि गांधी ने अपनी अर्जी के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की है और खेद व्यक्त किया। ऐसे बयान को देखते हुए, हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट के समक्ष आगे की कार्यवाही बंद कर दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"आवेदक ने BNSS की धारा 528 के तहत यह याचिका दायर की, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा 13.12.2024 को पारित आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत IPC की धारा 500 के तहत अपराध का संज्ञान लिया गया और आवेदक को समन जारी किया गया। आवेदक ने I.A. नंबर 14821/2026 के पैराग्राफ 2 में उल्लिखित कथित मानहानिपूर्ण बयान के लिए खेद व्यक्त किया। प्रतिवादी ने उक्त I.A. का जवाब दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि आवेदक द्वारा व्यक्त किए गए खेद को देखते हुए इस कोर्ट और ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही बंद कर दी जाए।
I.A. नंबर 14821/2026 में आवेदक के बयान उक्त I.A. पर दाखिल जवाब और दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों (जिनमें आवेदक ने खेद व्यक्त किया है) पर विचार करते हुए इस कोर्ट के समक्ष कार्यवाही बंद की जाती है। साथ ही JMFC, स्पेशल जज (MP और MLA) के समक्ष लंबित शिकायत मामला नंबर SCPPM नंबर 03/2018 भोपाल की कार्यवाही भी बंद मानी जाएगी।"
आरोप था कि गांधी ने एक चुनावी रैली के दौरान गलत तरीके से दावा किया कि कार्तिकेय सिंह का नाम पनामा पेपर्स लीक में आया था।
पनामा पेपर्स, जिन्हें इतिहास के सबसे बड़े फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट लीक में से एक माना जाता है, में पनामा की लॉ फर्म 'मोसैक फोंसेका' से लीक हुई 1.15 करोड़ से ज़्यादा फाइलें शामिल थीं। इन लीक से टैक्स हेवन (कम टैक्स वाले देशों) में बनाई गई ऑफशोर कंपनियों की जानकारी सामने आई, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर संपत्ति और फाइनेंशियल लेन-देन छिपाने के लिए किया जाता था।
इसके बाद गांधी ने हाई कोर्ट में एक अर्ज़ी दी, जिसमें उन्होंने कहा,
"आवेदक ने 29 अक्टूबर 2018 को उस समय चल रहे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान झाबुआ में कथित मानहानि वाला बयान दिया, जिसमें तथाकथित पनामा पेपर्स का ज़िक्र किया गया। जब उन्हें पता चला कि उस बयान में प्रतिवादी का नाम गलती से आ गया तो ठीक अगले दिन — यानी 30 अक्टूबर 2018 को — आवेदक ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि उनका मतलब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे से था, जिनका नाम बहुचर्चित पनामा पेपर्स विवाद में आया, न कि प्रतिवादी या उनके पिता (जो उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे) से। इस प्रकार, आवेदक खेद व्यक्त करते हैं। आवेदक अपने उस सार्वजनिक स्पष्टीकरण पर कायम हैं और उम्मीद करते हैं कि कार्यवाही स्वेच्छा से समाप्त कर दी जाएगी।"
इस प्रकार, हाईकोर्ट ने कार्यवाही बंद की।
Case title: RAHUL GANDHI v/s KARTIKEY SINGH CHAUHAN

