नानी कानूनी अभिभावक बने बिना भी नाबालिग के लिए भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Shahadat
21 Oct 2026 8:42 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नानी, नाबालिग की कानूनी अभिभावक (लीगल गार्जियन) नियुक्त हुए बिना भी CrPC की धारा 125 के तहत अपने नाती-नातिन के लिए भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं। [2026 LiveLaw (MP) 420]
इस बात पर जोर देते हुए कि CrPC की धारा 125 की व्याख्या सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जानी चाहिए, जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने कहा:
"CrPC की धारा 125 के प्रावधान की व्याख्या इस तरह की जानी चाहिए, जिससे सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिले और असहाय लोगों को इसका लाभ मिल सके। फैमिली कोर्ट इस तथ्य पर ध्यान देने में विफल रहा कि यहां नाबालिग के अधिकारों को लागू किया जाना है, न कि उसके प्रतिनिधि (यानी नानी) के अधिकारों को। फैमिली कोर्ट को नाबालिग बेटी को इस प्रावधान का लाभ देना चाहिए, भले ही वह किसी भी व्यक्ति के माध्यम से भरण-पोषण का दावा कर रही हो।"
एक नाबालिग बेटी ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ क्रिमिनल रिवीजन (आपराधिक पुनरीक्षण याचिका) दायर की। फैमिली कोर्ट ने CrPC की धारा 125 के तहत उसकी उस अर्जी को खारिज किया था, जिसमें उसने अपनी नानी के जरिए अपने पिता से भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की मांग की। कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज की थी कि नानी उसकी कानूनी अभिभावक (लीगल गार्जियन) नहीं हैं।
नाबालिग बेटी के वकील ने बताया कि उसके माता-पिता खराब रिश्तों के कारण अलग-अलग रह रहे हैं। उसका जन्म सितंबर 2015 में हुआ और मई 2018 में बीमारी के कारण उसकी माँ का निधन हो गया। उसने बताया कि उसके पिता ने उसे अपनी बेटी के रूप में स्वीकार नहीं किया, इसलिए वह अपनी नानी के साथ रह रही है, जो उसका ठीक से भरण-पोषण करने की स्थिति में नहीं हैं। इससे परेशान होकर उसने CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग करते हुए अर्जी दायर की।
हालांकि, फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर अर्जी खारिज की कि नानी कानूनी अभिभावक नहीं हैं, इसलिए भरण-पोषण की अर्जी दायर करने के लिए उन्हें पहले नाबालिग बेटी की कानूनी अभिभावक बनने के लिए आवेदन करना होगा।
कोर्ट ने गौर किया कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता, प्रतिवादी (पिता) की ही वैध बेटी है। अदालत ने यह भी गौर किया कि नाबालिग बेटी ने अपनी अर्जी में साफ तौर पर बताया कि उसकी माँ के निधन के बाद उसकी नानी उसकी देखभाल कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 'नागैया बनाम चौदम्मा' मामले का हवाला देते हुए बेंच ने दोहराया कि 'नेक्स्ट फ्रेंड' (नाबालिग की ओर से मामला चलाने वाला व्यक्ति) का 'हिंदू गार्जियनशिप एक्ट' के तहत विधिवत नियुक्त अभिभावक होना जरूरी नहीं है।
इसके अलावा, बेंच ने मद्रास, केरल और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के तीन फैसलों का आधार लेते हुए फिर से स्पष्ट किया:
"कोई भी व्यक्ति जिसे नाबालिग के प्रति पर्याप्त दिलचस्पी हो, वह CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के लिए अर्जी दे सकता है। इसके लिए CPC के 'ऑर्डर XXXII' में दी गई प्रक्रिया या अभिभावकता (गार्जियनशिप) के सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं है।"
अदालत ने कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का प्रावधान कल्याणकारी कानून है, जिसे इसके उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समझा जाना चाहिए। इस प्रकार, बेंच ने माना कि फैमिली कोर्ट ने अर्जी खारिज करके गलत काम किया। इसलिए मामले को फिर से विचार करने के लिए वापस फैमिली कोर्ट के पास भेज दिया गया।
Case Title : SC v SAC

