सिर्फ पत्नी को साथ रखने की बात कहना वैध भरण-पोषण प्रस्ताव नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Praveen Mishra

12 Aug 2025 6:43 PM IST

  • सिर्फ पत्नी को साथ रखने की बात कहना वैध भरण-पोषण प्रस्ताव नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पति ने अपनी पत्नी को फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए रखरखाव को इस आधार पर चुनौती दी है कि वह उसे अपने साथ रखने के लिए तैयार है, यह एक वैध प्रस्ताव नहीं है।

    पति ने दावा किया था कि क्योंकि वह प्रतिवादी पत्नी को अपने साथ रखने के लिए तैयार और इच्छुक है, इसलिए वह रखरखाव राशि की हकदार नहीं है। पति ने पत्नी के पक्ष में 3000 रुपए का मासिक गुजारा भत्ता देने के पारिवारिक अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट के समक्ष एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

    CrPC की धारा 125 पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण के आदेश से संबंधित है। धारा 125 (3) में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति जिसे रखरखाव का आदेश दिया गया है, आदेश का पालन करने से इनकार करता है, तो मजिस्ट्रेट जुर्माना लगाने के लिए प्रदान किए गए तरीके से देय राशि लगाने के लिए वारंट जारी कर सकता है।

    परंतु यह और कि यदि ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी का भरण-पोषण उसके साथ रहने की शर्त पर करने की पेशकश करता है और वह उसके साथ रहने से इंकार करती है तो ऐसा मजिस्ट्रेट उसके द्वारा बताए गए इंकार के किन्हीं आधारों पर विचार कर सकेगा और ऐसे प्रस्ताव के होते हुए भी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करने के लिए न्यायसंगत आधार है, तो वह इस धारा के अधीन आदेश दे सकेगा।

    इसका मतलब यह है कि भले ही पत्नी पति के साथ रहने से इनकार करती है, भले ही वह इस शर्त पर उसे बनाए रखने की पेशकश करती है कि वह उसके साथ रहती है, मजिस्ट्रेट उसके इनकार के आधार पर विचार कर सकता है और इस तरह के प्रस्ताव के बावजूद धारा 125 के तहत रखरखाव आदेश पारित कर सकता है यदि वह संतुष्ट है।

    जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने अपने आदेश में कहा कि पति ने परिवार अदालत के समक्ष अपनी पत्नी और बच्चे को अपने साथ रखने की पेशकश करने का आवेदन कभी नहीं दिया। इसने सीआरपीसी की धारा 125 (3) के दूसरे परंतुक का उल्लेख किया और कहा:

    "चूंकि याचिकाकर्ता ने कभी भी अपनी पत्नी को बनाए रखने की पेशकश नहीं की, इसलिए, केवल इसलिए कि उसने आवेदन के अपने जवाब में कहा है, इस न्यायालय का विचार है कि याचिकाकर्ता द्वारा अपने जवाब में लिया गया रुख याचिकाकर्ता द्वारा किया गया प्रस्ताव नहीं कहा जा सकता है।

    अदालत ने आगे टिप्पणी की कि पति को अपनी जिरह में पत्नी को पेशकश करनी चाहिए थी। अदालत ने आगे कहा कि पति को या तो अपने साक्ष्य में यही कहना चाहिए था या एक आवेदन दायर करना चाहिए था।

    अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता के अनुसार, उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

    इस तरह अदालत ने पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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