मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: महिला ऑपरेटर से पुलिसकर्मियों की सांस सूंघवाना “चौंकाने वाला”

Praveen Mishra

30 April 2026 5:24 PM IST

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: महिला ऑपरेटर से पुलिसकर्मियों की सांस सूंघवाना “चौंकाने वाला”

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल) को एक पुलिस इंस्पेक्टर के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिस पर आरोप है कि उसने डायल-100 कंट्रोल रूम में निजी महिला कॉल ऑपरेटर से नशे में संदिग्ध पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस चेक करवाई।

    चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—

    “क्या यह एक अधिकारी के लिए उचित है? क्या वह खुद जांच नहीं कर सकता था? एक महिला कर्मचारी को पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस सूंघने के लिए क्यों बुलाया गया?”

    यह मामला 19 फरवरी 2026 के एकल पीठ के आदेश से जुड़ा है, जिसमें इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया था। संबंधित अधिकारी को 8/9 सितंबर 2025 को बर्खास्त किया गया था, जब यह आरोप सामने आया कि 30-31 अगस्त 2025 की रात उसने महिला ऑपरेटर को डिस्पैच हॉल के बाहर खड़ा कर पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस जांचने के निर्देश दिए।

    यह घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई थी और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सत्यापित भी की गई। इसके बाद अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने Article 311(2)(b) of the Constitution of India के तहत बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी का आदेश दिया।

    हालांकि, एकल पीठ ने इस कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि अधिकारी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। साथ ही कोर्ट ने माना कि बिना जांच के बर्खास्तगी के लिए आवश्यक परिस्थितियां मौजूद नहीं थीं।

    राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि महिला ऑपरेटर एक संविदा कर्मचारी थी और उससे वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ बयान दिलवाना व्यावहारिक नहीं था, इसलिए जांच को टालना उचित था।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इंस्पेक्टर के व्यवहार को “चौंकाने वाला” बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और यह एक आपराधिक अपराध भी हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा—

    “अगर वह अपने ही कार्यालय में महिला कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार करता है, तो समाज की महिलाओं की सुरक्षा कैसे करेगा?”

    अधिकारी के वकील ने दलील दी कि महिला ऑपरेटर ने कोई शिकायत नहीं की है, लेकिन इस पर कोर्ट ने कहा कि उसने खुद वीडियो देखा है और ऐसा आचरण स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार महिला कर्मचारियों की गरिमा और प्रतिष्ठा बचाने के लिए जांच प्रक्रिया को छोड़ा जाता है।

    मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को होगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करेगा।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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