हॉस्टल में खराब खाने को लेकर पुराने केस न्यायिक सेवा की राह में बाधा नहीं: MP हाईकोर्ट
Praveen Mishra
8 Aug 2026 11:50 AM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उच्च न्यायिक सेवा के एक उम्मीदवार की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द करते हुए उसके मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि छात्र जीवन में दर्ज हुए दो आपराधिक मामलों में नैतिक अधमता (Moral Turpitude) से जुड़े अपराध नहीं थे और दोनों मामलों में उम्मीदवार बाद में बरी हो चुका था।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने MP Higher Judicial Service Examination-2017 के उम्मीदवार की याचिका पर सुनवाई की। उम्मीदवार ने आवेदन के समय 2002 में दर्ज दोनों मामलों की जानकारी दी थी। उसने परीक्षा में 450 में से 234 अंक हासिल किए और सामान्य वर्ग की प्रतीक्षा सूची में 7वां स्थान प्राप्त किया, लेकिन पुराने मामलों के आधार पर उसकी नियुक्ति की सिफारिश नहीं की गई।
मामले के अनुसार, ये केस एलएलबी की पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय के हॉस्टल में खराब खाने को लेकर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े थे। दोनों मामलों में बाद में समझौते के आधार पर उम्मीदवार बरी हो गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को उम्मीदवार की उम्र और उस समय की परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि उम्मीदवार का बाद का पेशेवर रिकॉर्ड साफ रहा और पुलिस की चरित्र सत्यापन रिपोर्ट में उसे सरकारी सेवा के लिए उपयुक्त बताया गया था।
कोर्ट ने सीधे नियुक्ति का आदेश देने के बजाय मामले को सक्षम प्राधिकारी के पास नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया।


