'हर शादी का अधूरा वादा रेप नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को किया बरी
Praveen Mishra
17 July 2026 3:31 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी से इनकार कर देने या शादी का वादा पूरा न होने मात्र से किसी व्यक्ति को दुष्कर्म (धारा 376 IPC) और आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 IPC) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कहा कि यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और झूठा वादा केवल शारीरिक संबंध बनाने के लिए किया था।
जस्टिस राजेंद्र कुमार वानी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
मामले में आरोप था कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर युवती से शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। बाद में शादी से इनकार करने पर युवती ने आत्महत्या कर ली। डीएनए रिपोर्ट में आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता पाया गया।
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि युवती के परिवार को दोनों के प्रेम संबंध की जानकारी थी और उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही धोखा देने की नीयत से शादी का वादा किया था। इसलिए यह संबंध सहमति से बना संबंध माना जाएगा और इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।
आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप पर भी अदालत ने कहा कि सिर्फ शादी से इनकार करना या शादी के लिए कोई शर्त रखना, अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। अभियोजन यह साबित करने में भी विफल रहा कि आरोपी ने ऐसा कोई कृत्य किया जिससे युवती आत्महत्या के लिए प्रेरित हुई हो।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।


