बरगी डैम नाव हादसे पर गठित न्यायिक जांच आयोग के बाद MP हाईकोर्ट ने PILs का किया निपटारा

Praveen Mishra

22 May 2026 12:22 PM IST

  • बरगी डैम नाव हादसे पर गठित न्यायिक जांच आयोग के बाद MP हाईकोर्ट ने PILs का किया निपटारा

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के बरगी डैम नाव हादसे को लेकर दायर जनहित याचिकाओं (PILs) के एक समूह का निपटारा कर दिया है। अदालत ने यह फैसला राज्य सरकार की उस जानकारी के बाद दिया, जिसमें बताया गया कि हादसे की जांच के लिए एक पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया जा चुका है।

    चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता एचएस रूपराह ने बताया कि आयोग ने आम जनता से सुझाव भी मांगे हैं।

    उन्होंने अदालत को बताया कि 1 मई 2026 के आदेश के तहत राज्यभर के सभी बोट क्लब और क्रूज सेवाओं का संचालन अगली सूचना तक रोक दिया गया है। इसके अलावा 6 मई 2026 के आदेश के जरिए एमपी टूरिज्म की विभिन्न इकाइयों की क्रूज बोट्स का सेफ्टी ऑडिट, सुरक्षा जांच और इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति मांगी ताकि वे न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपने सुझाव और प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर सकें।

    अदालत ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर याचिकाकर्ता अपनी शिकायतें दोबारा उठा सकते हैं।

    गौरतलब है कि 30 अप्रैल को जबलपुर स्थित बरगी डैम में एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित एक नाव तूफान के दौरान पलट गई थी। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 यात्रियों को बचा लिया गया था। इस घटना ने राज्य में पर्यटक क्रूज और जल परिवहन गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि गठित न्यायिक जांच आयोग हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों की जांच करेगा। साथ ही राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा, राज्यभर में नावों और जल गतिविधियों का सुरक्षा ऑडिट, एक समान SOP तैयार करना और सभी जल परिवहन स्थलों पर क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित करने जैसे मुद्दों पर भी काम करेगा।

    याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि राज्य में लगातार हो रहे नाव हादसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा हैं। बरगी डैम, मटालिया डैम और सीप नदी में पिछले वर्षों में हुए हादसों का हवाला देते हुए कहा गया कि कई त्रासदियों को उचित सुरक्षा उपाय अपनाकर रोका जा सकता था।

    PIL में यह भी कहा गया था कि लाइफ जैकेट की कमी, मौसम की निगरानी में लापरवाही, आपातकालीन तैयारी का अभाव, GPS ट्रैकिंग की अनुपस्थिति और क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने जैसी गंभीर खामियां लगातार बनी हुई हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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