GST अधिकारी को बदनाम करने और ₹1 करोड़ की उगाही के आरोप में पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत से इनकार

Praveen Mishra

4 July 2026 3:56 PM IST

  • GST अधिकारी को बदनाम करने और ₹1 करोड़ की उगाही के आरोप में पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत से इनकार

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिस पर GST आवेदन खारिज होने के बाद सहायक आयुक्त (GST) को सोशल मीडिया पर बदनाम करने और उनसे ₹1 करोड़ की उगाही करने का आरोप है।

    जस्टिस रत्नेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि उसने आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में अपना GST पंजीकरण कराने का दबाव बनाया और मना किए जाने पर सरकारी अधिकारी को सोशल मीडिया पर झूठी और अपमानजनक खबरें प्रकाशित करने की धमकी देकर डराने तथा अवैध लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया।

    अभियोजन के अनुसार, शिवपुरी की सहायक आयुक्त (GST) ने आरोपी का GST पंजीकरण आवेदन आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में 18 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी लगातार खुद को पत्रकार बताकर कार्यालय पहुंचा, आवेदन मंजूर करने का दबाव बनाया और कथित रूप से ₹20 लाख की मांग करते हुए सोशल मीडिया पर झूठी खबरें प्रकाशित करने की धमकी दी।

    शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बाद में फेसबुक पर अधिकारी के खिलाफ कई पोस्ट प्रकाशित कीं, जिनमें उनके आवास से जुड़ी जानकारी और भ्रामक आरोप भी शामिल थे। जब अधिकारी ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने कथित तौर पर ₹1 करोड़ की मांग की और राशि न मिलने पर लगातार बदनाम करने तथा परिवार को SC/ST Act के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी।

    आरोपी ने अदालत में दावा किया कि वह पत्रकार है और केवल शिकायतकर्ता के कथित अवैध कार्यों को उजागर कर रहा था, इसलिए उसे झूठा फंसाया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने केस डायरी में मौजूद व्हाट्सएप चैट और अन्य सामग्री का हवाला देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया धमकी और अवैध लाभ लेने के प्रयास के पर्याप्त संकेत हैं। इन परिस्थितियों में अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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