भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत विशेष न्यायिक और कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां

  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत विशेष न्यायिक और कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएस) ने पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता की जगह ले ली है और यह 1 जुलाई, 2024 को लागू हो गई है। यह नया कानूनी ढांचा भारत में विभिन्न न्यायिक और कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की शक्तियों और भूमिकाओं को रेखांकित करता है। लाइव लॉ हिंदी की पिछली पोस्ट में हमने बीएनएसएस के तहत दी गई आपराधिक अदालतों की श्रेणियों पर चर्चा की है।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, विभिन्न प्रकार के मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, अधिकार क्षेत्र और अधीनता के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करती है। इन प्रावधानों का विवरण देकर, संहिता का उद्देश्य न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है, जिससे भारत में एक स्पष्ट और कुशल कानूनी प्रणाली सुनिश्चित हो सके।

    यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बीएनएसएस ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अवधारणा को हटा दिया है। इसने मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की अवधारणा को भी हटा दिया है।

    विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (धारा 11) (Special Judicial Magistrate)

    धारा 11 के तहत, हाईकोर्ट, केंद्र या राज्य सरकार के अनुरोध पर, सरकारी पदों पर काम कर चुके व्यक्तियों को कुछ शक्तियाँ प्रदान कर सकता है। ये शक्तियाँ प्रथम या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समकक्ष हैं, जो निर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर विशिष्ट मामलों या मामलों के प्रकारों पर लागू होती हैं। हालाँकि, इन व्यक्तियों को हाईकोर्ट द्वारा निर्दिष्ट कानूनी मामलों में योग्यता या अनुभव पूरा करना होगा।

    इन नियुक्त व्यक्तियों को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट कहा जाता है और उनकी नियुक्ति की अवधि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार एक वर्ष से अधिक नहीं हो सकती है।

    स्थानीय सीमाएँ और अधिकार क्षेत्र (धारा 12)

    धारा 12 हाईकोर्ट के नियंत्रण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को स्थानीय क्षेत्रों को परिभाषित करने की अनुमति देती है, जहाँ धारा 9 या धारा 11 के तहत नियुक्त मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने निर्दिष्ट क्षेत्र में कहीं भी अदालत लगा सकते हैं। जब तक अन्यथा निर्दिष्ट न किया जाए, उनका अधिकार क्षेत्र पूरे जिले में फैला हुआ है। यदि मजिस्ट्रेट का अधिकार क्षेत्र एक से अधिक जिलों को कवर करता है, तो सत्र न्यायालय या मुख्य न्यायिक जिस्ट्रेट का कोई भी संदर्भ संबंधित जिला न्यायालयों से संबंधित होगा।

    मजिस्ट्रेट की अधीनता (धारा 13) (Jurisdiction of Magistrate)

    धारा 13 यह स्थापित करती है कि प्रत्येक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्र न्यायाधीश के अधीनस्थ है। सत्र न्यायाधीश के सामान्य नियंत्रण में अन्य सभी न्यायिक मजिस्ट्रेट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अधीनस्थ न्यायिक मजिस्ट्रेटों के बीच व्यवसाय के वितरण के संबंध में नियम या विशेष आदेश बना सकते हैं।

    कार्यकारी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति (धारा 14) (Executive Magistrate)

    धारा 14 राज्य सरकार को प्रत्येक जिले में आवश्यकतानुसार कार्यकारी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की अनुमति देती है, जिसमें से एक को जिला मजिस्ट्रेट के रूप में नामित किया जाता है। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए जा सकते हैं और उनके पास जिला मजिस्ट्रेट के समान शक्तियाँ होंगी।

    यदि जिला मजिस्ट्रेट का पद रिक्त हो जाता है, तो जिले के कार्यकारी प्रशासन को अस्थायी रूप से संभालने वाला अधिकारी राज्य सरकार के अगले आदेश तक जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करेगा।

    राज्य सरकार एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट को उप-विभाग का प्रभारी बना सकती है, जिसे उप-विभागीय मजिस्ट्रेट कहा जाता है, और इसकी नियुक्ति शक्तियाँ भी जिला मजिस्ट्रेट को सौंप सकती है। इसके अलावा, राज्य सरकार पुलिस आयुक्त को कोई भी या सभी कार्यकारी मजिस्ट्रेट शक्तियाँ प्रदान कर सकती है।

    विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (धारा 15) (Special Executive Magistrates)

    धारा 15 के अनुसार, राज्य सरकार विशिष्ट क्षेत्रों या कार्यों के लिए पुलिस अधीक्षक के पद से नीचे के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी नियुक्त कर सकती है। इन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेटों के पास राज्य सरकार द्वारा उचित समझी जाने वाली संहिता के तहत दी गई कुछ शक्तियाँ होंगी।

    स्थानीय सीमाओं को परिभाषित करना (धारा 16)

    धारा 16, राज्य सरकार के नियंत्रण में जिला मजिस्ट्रेट को स्थानीय सीमाओं को परिभाषित करने की अनुमति देती है, जिसके भीतर कार्यकारी मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। जब तक अन्यथा परिभाषित न किया जाए, उनका अधिकार क्षेत्र और शक्तियाँ पूरे जिले में विस्तारित होंगी।

    कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की अधीनता (धारा 17) (Subordination of Executive Magistrates)

    धारा 17 निर्दिष्ट करती है कि सभी कार्यकारी मजिस्ट्रेट जिला मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ हैं। उप-विभाग (उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के अलावा) में शक्तियों का प्रयोग करने वाले भी जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण के तहत उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ हैं। जिला मजिस्ट्रेट अधीनस्थ कार्यकारी मजिस्ट्रेटों के बीच व्यवसाय के वितरण या आवंटन के बारे में नियम या विशेष आदेश बना सकता है।

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