पुलिस ने रोका – आपके अधिकार क्या हैं?

Praveen Mishra

28 Aug 2025 4:46 PM IST

  • पुलिस ने रोका – आपके अधिकार क्या हैं?

    पुलिस ने रोका – आपके अधिकार क्या हैं?

    (चेकिंग, तलाशी और ट्रैफिक नियम)

    हम सबके साथ कभी न कभी ऐसा हुआ है कि पुलिस ने रास्ते में रोक लिया हो – कभी ट्रैफिक चेकिंग के नाम पर, तो कभी तलाशी (search) के लिए।

    लेकिन सवाल ये है कि ऐसे हालात में आपके अधिकार क्या हैं? और पुलिस आपको कहाँ तक रोक सकती है?

    1. ट्रैफिक चेकिंग के दौरान आपके अधिकार

    ड्राइविंग डॉक्यूमेंट्स – मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत, आपसे केवल 4 ज़रूरी डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं:

    (i) ड्राइविंग लाइसेंस

    (ii) RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट)

    (iii) इंश्योरेंस

    (iv) PUC (प्रदूषण प्रमाण पत्र)

    2. चालान मशीन / रसीद – अगर चालान काटा जा रहा है तो आपको चालान की रसीद देना अनिवार्य है।

    3. गाड़ी की चाबी / लाइसेंस ज़ब्त नहीं कर सकते – पुलिस सिर्फ चालान बना सकती है, गाड़ी की चाबी या लाइसेंस जब्त करने का अधिकार नहीं है (कुछ गंभीर मामलों को छोड़कर)।

    पुलिस चेकिंग और तलाशी (Search)

    1. महिला की तलाशी – महिला की तलाशी सिर्फ महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है और वह भी सम्मानजनक तरीके से।

    2. बिना वारंट तलाशी – पुलिस को संदेह होने पर (जैसे हथियार, नशे की चीज़ या प्रतिबंधित सामान) कुछ मामलों में बिना वारंट तलाशी का अधिकार है, लेकिन प्रक्रिया उचित होनी चाहिए।

    3. गवाह की मौजूदगी – तलाशी के दौरान पुलिस को कोशिश करनी चाहिए कि इलाके के 2 गवाह मौजूद हों।

    गिरफ्तारी के समय आपके अधिकार

    1. कारण बताना अनिवार्य – पुलिस आपको क्यों रोक रही है या गिरफ्तार कर रही है, यह बताना ज़रूरी है।

    2. किसी को सूचना देने का अधिकार – गिरफ्तारी के बाद आपको यह अधिकार है कि आप अपने परिवार/दोस्त को सूचना दें।

    3. वकील से मिलने का अधिकार – संविधान का अनुच्छेद 22 आपको यह हक देता है कि आप वकील से संपर्क कर सकें।

    आपको क्या नहीं करना चाहिए

    • पुलिस से बदतमीज़ी या झगड़ा न करें।

    • तुरंत डॉक्यूमेंट्स दिखाएँ और सहयोग करें।

    • अगर आपको लगे कि आपके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो घटना की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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