शेयर खरीद समझौते से संबंधित मामले कामर्शियल कोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

  • शेयर खरीद समझौते से संबंधित मामले कामर्शियल कोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि शेयर खरीद समझौते के संबंध में धन की वसूली से संबंधित मामले कामर्शियल कोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है।

    जस्टिस एच टी नरेंद्र प्रसाद ने भाषकर नायडू की याचिका को मंजूरी दे दी, जिसमें कामर्शियल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने अरविंद यादव द्वारा दायर धन वसूली के मुकदमे को वापस करने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 10 के तहत दायर आवेदन को खारिज कर दिया था।

    याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि वह कंपनी का शेयरधारक है, और प्रतिवादी/वादी एक तीसरा पक्ष है। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच याचिकाकर्ता से संबंधित शेयरों की बिक्री के उद्देश्य से एक समझौता हुआ था। 09.10.2020 का समझौता केवल एक शेयर खरीद समझौता है और यह शेयरधारक समझौता नहीं है। इसलिए, यह मुकदमा वाणिज्यिक न्यायालय के समक्ष विचारणीय नहीं है।

    इसके अलावा, यह प्रस्तुत किया गया था कि कामर्शियल कोर्ट के अधिनियम की धारा 2 (1) (c) (xii) के अनुसार, केवल शेयरधारक समझौते से संबंधित विवाद केवल वाणिज्यिक न्यायालय के समक्ष बनाए रखने योग्य हैं और शेयर खरीद समझौते के संबंध में विवाद नहीं हैं।

    कोर्ट का निर्णय:

    पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता/प्रतिवादी बेंगलुरु फ्रेश फ्रूट्स प्राइवेट लिमिटेड का शेयरधारक है। वह अपने शेयर किसी तीसरे पक्ष को बेचना चाहता है। प्रतिवादी/वादी इसे खरीदने के लिए सहमत हुए। उस उद्देश्य के लिए, उन्होंने 09.10.2020 को एक समझौता किया है। यह मुकदमा अनुबंध-ख अर्थात् शेयर क्रय करार के संबंध में धन की वसूली के लिए दायर किया गया है।

    इसने अधिनियम की धारा 2 (1) (c) का उल्लेख किया जो "कामर्शियल विवाद" को परिभाषित करता है। इस प्रकार यह माना गया कि "कमर्शियल कोर्ट के समक्ष प्रतिवादी/वादी द्वारा दायर मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। ट्रायल कोर्ट ने CPC के Order VII Rule 10 के तहत याचिकाकर्ता/प्रतिवादी द्वारा दायर आवेदन को खारिज करने में गलती की है।

    याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा, चूंकि मामला प्रधान सिटी सिविल एवं सत्र न्यायाधीश, बेंगलुरु के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए मामले को कानून के अनुसार किसी अन्य नियमित अदालत को फिर से आवंटित करने के लिए प्रिंसिपल सिटी सिविल एंड सेशंस जज, बेंगलुरु की अदालत को वापस भेज दिया गया है।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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