सार्वजनिक भाषणों के असहमति की आड़ में गलत तरीके से चारित्रिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए: BJP नेता के खिलाफ मानहानि मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट

  • सार्वजनिक भाषणों के असहमति की आड़ में गलत तरीके से चारित्रिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए: BJP नेता के खिलाफ मानहानि मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट

    श्री राम सेना के संस्थापक अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक की शिकायत पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता वी सुनील कुमार के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा, "लोकतंत्र की मूल भावना होने के नाते असहमति की आड़ में, भाषणों को किसी भी व्यक्ति के चरित्र को खराब नहीं करना चाहिए जब तक कि यह तथ्यों से पैदा न हो।

    मुतालिक ने एक चुनावी रैली में मुतालिक और उनके परिवार के बारे में कुछ अरुचिकर टिप्पणी करने के बाद कुमार के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

    जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल जज बेंच ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि चुनावी रैलियों के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को इस तरह के बयानों के लिए बहरा हो जाना चाहिए या मोटी चमड़ी वाला हो जाना चाहिए और रैलियों के दौरान दिए गए बयानों के बारे में भावुक नहीं होना चाहिए।

    पीठ ने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं है कि असहमति लोकतंत्र का सार है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होगा कि किसी बयान को बनाने वाला किसी चुनावी रैली के दौरान या चुनाव के बाद की रैली में दिए जाने की आड़ में किसी भी बयान के लिए बच सकता है। सार्वजनिक रूप से भाषण देना उक्त व्यक्ति के खिलाफ दिया गया भाषण है जो हर एक को पता होगा। इस डिजिटल युग में बोली गई कोई भी बात बोलने वाले व्यक्ति के पास नहीं रहती है। इसे कुछ ही समय में प्रसारित किया जाता है।

    कुमार ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए शुरू किए गए अभियोजन को रद्द करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

    कुमार ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जबकि मुतालिक ने राज्य विधानसभा चुनाव में करकला निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। आरोप है कि कुमार के चुनाव जीतने के बाद उन्होंने मुतालिक के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयान दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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