NIA केस में बरी हुए पाकिस्तानी व्यक्ति को 'फॉरेनर्स एक्ट' के तहत आवाजाही पर लगी पाबंदी लागू रहने तक रिहा नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

  • NIA केस में बरी हुए पाकिस्तानी व्यक्ति को फॉरेनर्स एक्ट के तहत आवाजाही पर लगी पाबंदी लागू रहने तक रिहा नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक द्वारा दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका खारिज की। याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज NIA मामलों में बरी होने के बाद भारत से तुरंत रिहाई और अपने देश वापस भेजे जाने (डिपोर्टेशन) की मांग की थी।

    जस्टिस अनु शिवरामन और जस्टिस के.एस. भरत की खंडपीठ ने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ 'फॉरेनर्स एक्ट, 1946' की धारा 3(2)(e) के तहत आवाजाही पर पाबंदी का आदेश पारित किया गया, वह तब तक रिहाई की मांग नहीं कर सकता, जब तक कि उसके पास भारत में कानूनी रूप से रहने के लिए वैध वीज़ा न हो। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता ने आवाजाही पर लगी इस पाबंदी को चुनौती नहीं दी।

    यह याचिका 32 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद फहद ही (उर्फ मोहम्मद कोया) ने दायर की थी। उसने बताया कि उसे बेंगलुरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला (सोंडेकोप्पा) स्थित 'फॉरेनर्स डिटेंशन सेंटर' (विदेशी नागरिक हिरासत केंद्र) में रखा गया है।

    उसने बताया कि NIA मामलों में अपनी दोषसिद्धि (कनविक्शन) को चुनौती देने के बाद 25 सितंबर 2024 के फैसले में उसे बरी कर दिया गया। उसके बरी होने के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर अपील भी खारिज कर दी गई। इसलिए याचिकाकर्ता ने यह तर्क देते हुए अपनी रिहाई की मांग की कि उसके खिलाफ अब कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।

    याचिकाकर्ता के खिलाफ आवाजाही पर लगी पाबंदी के आदेश को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसे रिहा करने से इनकार किया।

    खंडपीठ ने कहा,

    "हालांकि याचिकाकर्ता के वकील का तर्क है कि उसे केवल आपराधिक मामलों के लंबित होने की वजह से हिरासत केंद्र में रखा गया, लेकिन हमारी राय है कि 'फॉरेनर्स एक्ट' के प्रावधानों के तहत आवाजाही पर पाबंदी का आदेश लागू है। चूंकि याचिकाकर्ता विदेशी नागरिक है और यह बात भी स्पष्ट है कि उसके पास भारत में कानूनी रूप से रहने के लिए कोई वैध वीज़ा नहीं है, इसलिए वह रिहाई की मांग नहीं कर सकता।"

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "चूंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ आवाजाही पर पाबंदी का आदेश पारित किया गया—चाहे वह सही हो या गलत—इसलिए हमारी राय है कि उसे इस आदेश को उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए चुनौती देनी चाहिए।"

    इसके अनुसार, खंडपीठ ने याचिका का निपटारा किया और उसे उसके खिलाफ पारित आवाजाही पर रोक के आदेश के संबंध में अनुमति दी।

    Case Title : SRI MOHAMMED FAHAD HI @ MOHAMMED KOYA VS. STATE OF KARNATAKA & OTHERS

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