सोशल मीडिया पर खबर शेयर करना सांप्रदायिक अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने X अकाउंट एडमिन के खिलाफ FIR रद्द की

  • सोशल मीडिया पर खबर शेयर करना सांप्रदायिक अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने X अकाउंट एडमिन के खिलाफ FIR रद्द की

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुत्तूर में एक महिला के कथित पीछा करने और चाकू से धमकी देने की घटना से जुड़ी खबर X (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर करने के मामले में अकाउंट एडमिन के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है।

    जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि किसी घटना की खबर साझा करने मात्र से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत अपराध नहीं बनता, जब तक संबंधित अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद न हों। कोर्ट ने एक ही घटना को लेकर कई FIR दर्ज करने पर पुलिस की आलोचना भी की।

    क्या है मामला?

    याचिकाकर्ता संदीप कुमार 'Karnataka Portfolio' नामक X अकाउंट के एडमिन हैं। जुलाई 2026 में पुत्तूर में छह युवकों पर एक महिला का पीछा करने और चाकू से धमकी देने के आरोप लगे थे। इस घटना की खबर को संदीप कुमार ने अपने अकाउंट पर “Law and Order under Fire: Six held after Hindu woman alleges knife threat in Puttur” कैप्शन के साथ रीपोस्ट किया।

    इसके बाद आरोपी युवकों में से एक की शिकायत पर पुलिस ने सांप्रदायिक तनाव फैलाने के आरोप में BNS की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज की। याचिकाकर्ता के अनुसार, इसी घटना को लेकर अलग-अलग व्यक्तियों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ सात FIR दर्ज की गई थीं।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी

    कोर्ट ने कहा कि मूल घटना गंभीर थी और सोशल मीडिया पर इसकी रिपोर्टिंग करना अपराध नहीं है, जब तक पोस्ट में वैमनस्य फैलाने का आवश्यक इरादा या अपराध के अन्य तत्व मौजूद न हों।

    पीठ ने पाया कि संबंधित ट्वीट में किसी धार्मिक समुदाय का नाम नहीं लिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आलोचना या किसी घटना की रिपोर्टिंग के आधार पर BNS की धारा 353(2) लागू नहीं की जा सकती।

    पुलिस के लिए दिशानिर्देश

    कोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में पुलिस को निर्देश दिया कि:

    - FIR दर्ज करने से पहले आरोपों में अपराध के आवश्यक तत्वों की जांच की जाए।

    - एक ही घटना या समान पोस्ट पर केवल शिकायतकर्ता अलग होने के कारण कई FIR दर्ज न की जाएं।

    - जहां कानून अनुमति देता है, वहां BNSS की धारा 173(3) के तहत प्रारंभिक जांच पर विचार किया जाए।

    - BNS की धारा 353(2) लागू करने से पहले आवश्यक इरादे और वैमनस्य फैलाने से संबंधित तत्वों की जांच की जाए।

    - गिरफ्तारी स्वतः न की जाए और BNSS की धारा 35 तथा Arnesh Kumar फैसले के सिद्धांतों का पालन किया जाए।

    कोर्ट ने कर्नाटक के DG एवं IGP को इन दिशानिर्देशों का सभी पुलिस अधिकारियों से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।

    इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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