कथित भूमि अतिक्रमण मामले में श्री श्री रविशंकर को राहत, हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

Praveen Mishra

25 March 2026 5:46 PM IST

  • कथित भूमि अतिक्रमण मामले में श्री श्री रविशंकर को राहत, हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार (25 मार्च) को बेंगलुरु में कथित भूमि अतिक्रमण मामले में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द (quash) कर दिया।

    जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां अन्य आरोपियों या अन्य मंचों पर लंबित कार्यवाहियों पर लागू नहीं होंगी। विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है।

    यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें आध्यात्मिक गुरु ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी थी। इससे पहले 13 जनवरी को कोर्ट ने उनके खिलाफ जांच पर रोक लगा दी थी।

    यह FIR बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन टास्क फोर्स पुलिस द्वारा कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 की धारा 192A के तहत दर्ज की गई थी। इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा करता है, तो उसे एक वर्ष तक की सजा और पांच हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

    यह मामला हाईकोर्ट की एक खंडपीठ द्वारा एक जनहित याचिका (PIL) में दिए गए आदेश के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों ने सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण किया है, जिसमें राजकालुवे (झीलों को जोड़ने वाली वर्षा जल निकासी प्रणाली) भी शामिल है।

    इस PIL में श्री श्री रविशंकर को भी अन्य व्यक्तियों के साथ प्रतिवादी नंबर 5 बनाया गया था, जिन्हें बाद में इस मामले में आरोपी के रूप में शामिल किया गया।

    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि मानचित्र से संकेत मिलता है कि काग्गलिपुरा गांव, उत्तरहल्ली होबली, बेंगलुरु दक्षिण तालुक के सर्वे नंबर 164/2, 163/3, 161/7 और 160 में निर्माण किया गया है।

    इसके अलावा, सर्वे नंबर 150, जो एक जलाशय (टैंक) के रूप में चिन्हित है, का भी बड़ा हिस्सा अतिक्रमण का शिकार हुआ है।

    सरकार के इस रुख को ध्यान में रखते हुए कि सार्वजनिक भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण हुआ है, खंडपीठ ने PIL का निपटारा करते हुए निर्देश दिया था कि कानून के अनुसार अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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