मुस्लिम लड़कियों पर कथित भड़काऊ बयान मामले में लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ FIR पर कर्नाटक हाईकोर्ट की रोक

  • मुस्लिम लड़कियों पर कथित भड़काऊ बयान मामले में लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ FIR पर कर्नाटक हाईकोर्ट की रोक

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ दर्ज FIR की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। उन पर धारवाड़ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम लड़कियों को लेकर कथित भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी बयान देने का आरोप है।

    जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार की एकलपीठ ने 7 मई के आदेश में कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, लेकिन प्रथमदृष्टया अंतरिम राहत देने का मामला बनता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि धारवाड़ टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज Crime No.0063/2026 से संबंधित आगे की सभी कार्यवाहियों पर अगली सुनवाई तक रोक रहेगी।

    अदालत ने राज्य सरकार को इस बीच अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय भी दिया है।

    सुलीबेले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1) के तहत FIR दर्ज की गई थी, जो धर्म, भाषा, नस्ल या अन्य आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित है।

    याचिका में कहा गया कि FIR दर्ज करने से पहले BNS की धारा 173(3) के तहत कोई प्रारंभिक जांच नहीं की गई। साथ ही आरोपों को अस्पष्ट और राजनीतिक प्रेरित बताया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि शिकायत किसी आम नागरिक ने नहीं बल्कि एक पुलिस कांस्टेबल ने दर्ज कराई, जो “पीड़ित” या “प्रभावित व्यक्ति” नहीं माना जा सकता।

    सुलीबेले की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणा श्याम ने अदालत में तर्क दिया कि कथित बयान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि BNS की धारा 196 के आवश्यक तत्व इस मामले में लागू नहीं होते।

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के Imran Pratapgarhi v. State of Gujarat फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि संवैधानिक अदालतों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे रहना चाहिए।

    दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने सुलीबेले को अंतरिम राहत देते हुए FIR पर रोक लगा दी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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