नाबालिग से शादी और शारीरिक संबंध के आरोपी को कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली जमानत, अदालत ने कहा— 'लड़की को थी सांसारिक समझ'
Praveen Mishra
26 Jun 2026 2:03 PM IST

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से शादी करने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी 28 वर्षीय युवक को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से टिप्पणी की कि लड़की को अपने कार्यों के परिणामों के बारे में 'सांसारिक समझ' (Worldly Knowledge) थी।
हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस एस. विश्वजीत शेट्टी ने मामले की सुनवाई करते हुए नोट किया कि आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे से प्यार करते थे, उन्होंने मंदिर में शादी की और काफी समय तक साथ रहे थे।
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
जस्टिस एस. विश्वजीत शेट्टी ने अपने आदेश में कहा:
“...ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़िता और याचिकाकर्ता (आरोपी) एक-दूसरे से प्यार करते थे। उन्होंने एक मंदिर में शादी की, एक किराए के घर में काफी समय तक साथ रहे और उनके बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने। घटना की तारीख को पीड़िता की उम्र लगभग 17 वर्ष थी, इसलिए उसे अपने इस कृत्य के परिणामों के बारे में सांसारिक समझ (Worldly Knowledge) थी।”
अदालत ने आगे कहा कि इस मामले में अभी मुकदमा (Trial) शुरू होना बाकी है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को एक पूर्ण सुनवाई के दौरान साबित करना होगा। आरोपी 19 मई से न्यायिक हिरासत में था, इसलिए अदालत ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया।
क्या था पूरा मामला?
कोलार जिले के श्रीनिवासपुर पुलिस स्टेशन में पीड़िता की मां ने 16 मई 2025 को एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी 17 वर्षीय बेटी 28 अप्रैल 2025 को कॉलेज के लिए निकली थी, लेकिन वापस घर नहीं लौटी।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी और नाबालिग लड़की का पता लगाया, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले, 25 अक्टूबर 2025 को निचली अदालत (Trial Court) ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया था।
पीड़िता और मकान मालिक के बयानों पर कोर्ट का रुख
सनवाई के दौरान अदालत ने अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए पीड़िता के बयान (धारा 183 बीएनएसएस / BNSS) पर गौर किया। अपने बयान में लड़की ने स्वीकार किया था कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी, उन्होंने शादी की और किराए के मकान में पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
हालांकि, लड़की ने यह भी कहा था कि बाद में आरोपी उसकी निष्ठा पर शक करने लगा था और काम पर जाने से पहले उसे घर के अंदर बंद कर देता था, जिसके कारण उसके माता-पिता उसे वापस घर ले आए।
इस बिंदु पर, हाईकोर्ट ने मकान मालिक (रमेश) के बयान की समीक्षा की। मकान मालिक ने पुलिस को दिए बयान में आरोपी द्वारा लड़की को प्रताड़ित करने या घर में बंद करने जैसी किसी भी बात का जिक्र नहीं किया था और न ही लड़की ने कभी उससे ऐसी कोई शिकायत की थी। इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को जमानत देना उचित समझा।
कड़ी शर्तों के साथ मिली जमानत
अदालत ने आरोपी को कुछ सख्त शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया है:
आरोपी को ₹1 लाख का व्यक्तिगत मुचलका (Personal Bond) और इतनी ही राशि के दो जमानतदार (Sureties) पेश करने होंगे।
उसे निचली अदालत में हर पेशी की तारीख पर नियमित रूप से उपस्थित होना होगा।
वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित या डराने-धमकाने का प्रयास नहीं करेगा।
पंजीकृत धाराएं: आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 137(2), 64(2)(m), 127(2), 127(3) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 4 व 6 और बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

