'शो कॉज़ नोटिस' के साथ ड्रग लाइसेंस सस्पेंड नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
Shahadat
16 Oct 2026 10:07 AM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि 'शो कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) और लाइसेंस सस्पेंशन (निलंबन) आदेश को एक साथ मिलाकर जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने का आदेश तभी दिया जा सकता है, जब लाइसेंस धारक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए कि उसके खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों न की जाए।
बता दें कि 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स, 1945' के नियम 66(1) के तहत अगर लाइसेंस धारक शर्तों या कानूनों का पालन नहीं करता है तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी उसका लाइसेंस सस्पेंड या रद्द कर सकती है। ऐसा करने से पहले, अथॉरिटी को लाइसेंस धारक को यह बताने का मौका देना होगा कि उसके खिलाफ ऐसा आदेश क्यों न जारी किया जाए।
इस मामले में कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 'वेलनेस फॉरएवर केमिस्ट्स' (Wellness Forever Chemists) अपना कारोबार कानून के अनुसार जारी रख सकता है। हालांकि, जब तक संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी कोई अगली कार्रवाई नहीं करती, तब तक वे "ज़विसेफ्टा (Zavicefta) और एम्बलेवियो (Emblaveo) इंजेक्शन" का कारोबार नहीं कर सकेंगे।
कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने 'शो कॉज़ नोटिस' का जवाब दिया। इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि लाइसेंस सस्पेंड करने वाले इस नोटिस-सह-आदेश को केवल एक 'शो कॉज़ नोटिस' माना जाए। साथ ही अथॉरिटी से कहा गया कि वे याचिकाकर्ता का जवाब देखने के बाद ही उचित आदेश जारी करें।
इस प्रावधान पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस सी.एम. पूनाचा ने कहा:
"नियम 66 के उप-नियम (1) को पढ़ने से साफ पता चलता है कि लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने का आदेश देने से पहले, याचिकाकर्ता को 'शो कॉज़ नोटिस' मिलना चाहिए।"
हाईकोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ता को 'शो कॉज़ नोटिस' दिया गया और उसी समय उसका लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिया गया।
कोर्ट ने कहा,
"इस मामले में, जो नोटिस-सह-आदेश जारी किया गया, उसमें न केवल याचिकाकर्ता को उसके खिलाफ लगे आरोपों के बारे में बताया गया, बल्कि उसका लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिया गया। यह नियम 66 के उप-नियम (1) के खिलाफ है।"
यह मामला लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा 19 सितंबर, 2026 को जारी किए गए एक 'कारण बताओ नोटिस सह निलंबन आदेश' (SCN-cum-Suspension Order) से शुरू हुआ, जिसके तहत रिटेल चेन 'मेसर्स वेलनेस फॉरएवर केमिस्ट्स एंड लाइफस्टाइल स्टोर्स' का फार्मास्युटिकल उत्पादों के कारोबार से जुड़ा लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने 'मेसर्स विवा फार्मा' से 'ज़विसिफ्टा इंजेक्शन' (Zavicefta Injection) खरीदा था, जो कथित तौर पर 'मेसर्स फाइज़र लिमिटेड, बेंगलुरु' का एक अनधिकृत सप्लाई चैनल है। अथॉरिटी का यह भी कहना है कि बाद में याचिकाकर्ता ने उक्त उत्पाद को कई अन्य इकाइयों को बेच दिया। निलंबन आदेश से असंतुष्ट होकर, फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और 1945 के नियमों के नियम 66(1) पर विचार करते हुए, लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा जारी आदेश के स्वरूप में बदलाव किया।
हाईकोर्ट ने कहा,
"उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए 19.09.2026 के नोटिस सह आदेश को केवल एक 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) माना जाएगा। 21.09.2026 को दिए गए जवाब के अलावा, याचिकाकर्ता को 08.10.2026 तक (या उससे पहले) एक अतिरिक्त जवाब दाखिल करने की अनुमति होगी। इसके बाद, संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करेंगे।"
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा,
"जब तक संबंधित प्रतिवादियों (Respondents) द्वारा कोई अगली कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक याचिकाकर्ता को कानून के दायरे में रहकर अपना कारोबार जारी रखने की अनुमति होगी, लेकिन इसमें 'ज़विसिफ्टा' (Zavicefta) और 'एम्ब्लेवियो' (Emblaveo) इंजेक्शन का कारोबार शामिल नहीं होगा।"
Case Title : M/S.WELLNESS FOREVER CHEMISTS AND LIFESTYLE STORE VS ASSISTANT DRUGS CONTROLLER - 3(P) AND LICENSING AUTHORITY

