किसी महिला के शारीरिक रूप-रंग पर 'बॉडी शेमिंग' करना IPC की धारा 509 के तहत मर्यादा के अपमान का अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

  • किसी महिला के शारीरिक रूप-रंग पर बॉडी शेमिंग करना IPC की धारा 509 के तहत मर्यादा के अपमान का अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में शिकायतकर्ता के साथ बॉडी शेमिंग और मौखिक दुर्व्यवहार करने के आरोपी दो लोगों के खिलाफ महिला की मर्यादा भंग करने की आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि अकेले बॉडी शेमिंग करना IPC की धारा 509 के तहत महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध नहीं बनता। [2026 LiveLaw (Kar) 399]

    धारा 509 के अनुसार, जो कोई भी किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने के इरादे से कोई शब्द कहता है, कोई आवाज़ या इशारा करता है, या कोई वस्तु दिखाता है - इस इरादे से कि वह शब्द या आवाज़ उस महिला द्वारा सुनी जाए, या वह इशारा या वस्तु उसके द्वारा देखी जाए - या उस महिला की निजता में दखल देता है, तो उसे दंडित किया जाएगा।

    जस्टिस एस.आर. कृष्णा कुमार की सिंगल जज बेंच ने दो आरोपी महिलाओं के खिलाफ कार्यवाही रद्द करते हुए कहा:

    "...शिकायत, FIR और चार्जशीट की सामग्री (जिसमें शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान शामिल हैं) को देखने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि इनमें IPC की धारा 509 के तहत अपराध के लिए ज़रूरी तत्व मौजूद नहीं हैं, जैसा कि प्रतिवादियों ने आरोप लगाया है; यह ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि IPC की धारा 509 के तहत अपराध के लिए ज़रूरी तत्वों को देखते हुए सिर्फ़ इसलिए कि याचिकाकर्ताओं और आरोपी नंबर 3 पर शिकायतकर्ता की बॉडी शेमिंग करने और उसके शारीरिक रूप-रंग को लेकर अपमानित करने का आरोप है, यह नहीं कहा जा सकता कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से IPC की धारा 509 के तहत दंडनीय अपराध का होना साबित होता है..."

    कोर्ट ने कहा कि कथित अपराध के लिए ज़रूरी शुरुआती तत्व (Prima facie Ingredients) पूरे नहीं हुए।

    कोर्ट ने 'समानता के सिद्धांत' (Doctrine of Parity) को भी लागू किया क्योंकि सह-आरोपियों में से एक, जो एक लड़का है, उसे हाई कोर्ट पहले ही इस अपराध से बरी कर चुका है।

    आरोपी लड़के ने पहले 2024 में कोर्ट का रुख किया और उसकी याचिका स्वीकार की गई। इस मामले में कोर्ट ने देखा कि लड़कियों पर लगे आरोप, उसी घटना के संबंध में लड़के पर लगे आरोपों के 'बिल्कुल एक जैसे, मिलते-जुलते और समान' है।

    कोर्ट ने कहा,

    "....रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने से पता चलता है कि 09.08.2023 को, दूसरे प्रतिवादी—यानी असल शिकायतकर्ता—ने पहले प्रतिवादी—यानी पुलिस अधिकारियों—के सामने याचिकाकर्ताओं और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई... इस तथ्य के अलावा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से याचिकाकर्ताओं द्वारा IPC की धारा 509 के तहत अपराध किए जाने का पता नहीं चलता है, मेरी सोच यह है कि समानता के सिद्धांत (Doctrine of Parity) को लागू करना और याचिकाकर्ताओं—आरोपी नंबर 1 और 2—के खिलाफ चल रही कार्यवाही रद्द करना उचित और सही होगा..."

    बता दें, दूसरे प्रतिवादी ने शिकायत की थी कि 2023 में तीन अनजान लोगों—जिनमें दो लड़कियां और एक लड़का शामिल था—ने एक सार्वजनिक स्थान पर उसे और उसकी सहेली को अपशब्द कहे थे। इन अपशब्दों में मोटापे और शरीर की बनावट का मज़ाक उड़ाना, नस्लभेदी टिप्पणियां और अश्लील शब्द शामिल थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपी शराब के नशे में थे और उन्होंने उस पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

    इसके बाद सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन में याचिकाकर्ताओं और आरोपी लड़के के खिलाफ IPC की धारा 509 के तहत अपराध के लिए FIR दर्ज की गई। जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की।

    कोर्ट ने माना कि शिकायत, FIR, चार्जशीट की सामग्री और गवाहों के बयानों से IPC की धारा 509 के तहत अपराध के लिए ज़रूरी तत्व साबित नहीं होते हैं। इसलिए आपराधिक याचिका मंज़ूरी दी गई और संबंधित कोर्ट में चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।

    Case Title : Amrita M v. State of Karnataka & Ors

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