एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
Amir Ahmad
27 March 2026 11:34 AM IST

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की पेंशन केवल एक घटना में अनियमितता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि कर्मचारी का पूरा सेवा काल गंभीर रूप से असंतोषजनक रहा हो या उसने गंभीर कदाचार किया हो।
चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा।
मामला जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर से जुड़ा था जिन पर माइक्रोलिफ्ट योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे। रिटायरमेंट के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन में 5 वर्षों के लिए 15% कटौती कर दी गई।
राज्य सरकार ने दलील दी कि जांच में कर्मचारी दोषी पाए गए और उनकी सेवा संतोषजनक नहीं थी, इसलिए झारखंड पेंशन नियम 2000 के तहत कार्रवाई की गई।
वहीं कर्मचारी ने कहा कि उनके खिलाफ कोई विधिवत विभागीय जांच नहीं हुई और उन्हें सुनवाई का उचित अवसर भी नहीं दिया गया। साथ ही मामला बहुत पुराने समय (2003-04) से जुड़ा था।
अदालत ने पाया कि नियमों के अनुसार पेंशन में कटौती तभी की जा सकती है, जब कर्मचारी के खिलाफ गंभीर कदाचार साबित हो और उसकी पूरी सेवा अवधि असंतोषजनक पाई जाए।
खंडपीठ ने कहा कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे सेवा काल को खराब नहीं माना जा सकता। इसके लिए पूरे सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन जरूरी है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आरोप या अनियमितता के आधार पर पेंशन में कटौती नहीं की जा सकती, जब तक कि विधिवत विभागीय या न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कदाचार सिद्ध न हो।
हाईकोर्ट ने पाया कि इस मामले में न तो पूर्ण विभागीय जांच हुई और न ही गंभीर कदाचार साबित हुआ।
इसी आधार पर अदालत ने माना कि पेंशन में कटौती का आदेश गलत था और एकल पीठ द्वारा उसे रद्द किया जाना सही था।
अंततः हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज की और कर्मचारी को दी गई राहत बरकरार रखी।

