नियमित नियुक्ति बिना उचित प्रक्रिया के रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

Amir Ahmad

21 Aug 2026 5:57 PM IST

  • नियमित नियुक्ति बिना उचित प्रक्रिया के रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

    झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना खत्म नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस दीपक रोशन ने 2023 की विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती रद्द करने वाली अधिसूचना पर रोक लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस आधार रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे यह पता चले कि कथित भ्रष्टाचार में कौन-कौन से उम्मीदवार शामिल थे। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच अभी चल रही है।

    याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत विधिवत हुई। लेकिन 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए अचानक पूरी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई और इसके परिणामस्वरूप उनकी सेवाएं समाप्त की गईं।

    याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि उन्हें सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना यह कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बजाय कथित दबाव में सरकार ने पूरी भर्ती रद्द करने का फैसला लिया।

    राज्य सरकार की ओर से सीनियर सीनियर अपर एडवोकेट जरनल ने कहा कि हालांकि सरकार की ओर से अभी जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, लेकिन विभिन्न नागरिकों की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर राज्य ने मामले की गहन जांच शुरू की। अपराध अनुसंधान विभाग जांच कर रहा है और कुछ गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।

    राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई थीं और इसी वजह से विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत हुई पूरी नियुक्ति रद्द करने का फैसला लिया गया।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस दीपक रोशन ने अंतरिम आदेश में कहा, प्रथम दृष्टया इस अदालत का मत है कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना बाधित या समाप्त नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि अभी तक राज्य के पास ऐसा कोई मैटिरियल नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो कि कथित भ्रष्टाचार में कौन से उम्मीदवार शामिल हैं। वहीं, जांच एजेंसी पहले से ही मामले की जांच कर रही है।

    अदालत ने कहा कि न्याय का हित सर्वोपरि है और मौजूदा परिस्थितियों में 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना पर रोक लगाना न्यायहित में है, क्योंकि उसके प्रभाव से याचिकाकर्ताओं की सेवाएं बिना कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए समाप्त हो गई थीं।

    हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना संख्या 06/एलओ.एस.ए.-01-07/5404 पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत हुई भर्ती के संबंध में अधिसूचना का संचालन, क्रियान्वयन और प्रभाव अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा।

    कोर्ट ने सीनियर अपर एडवोकेट जरनल को संबंधित विभाग को यह निर्देश देने को कहा कि याचिकाकर्ताओं और इसी तरह प्रभावित अन्य कर्मचारियों को रिट याचिका के निपटारे तक काम करने दिया जाए।

    हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एक शपथपत्र या लिखित आश्वासन दाखिल करने का निर्देश दिया है कि संबंधित आपराधिक मामले में विचारण अदालत का अंतिम फैसला उन पर बाध्यकारी होगा।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उस फैसले के आधार पर सरकार कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

    राज्य सरकार को जांच और मामले में हुई आगे की प्रगति का विस्तृत विवरण जवाबी हलफनामे के जरिए दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

    मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर, 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगी।

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