मेडिकल कॉलेज को दी गई फीस को IPC की धारा 406 के तहत 'सौंपी गई संपत्ति' नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

Shahadat

31 Aug 2026 7:21 PM IST

  • मेडिकल कॉलेज को दी गई फीस को IPC की धारा 406 के तहत सौंपी गई संपत्ति नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी छात्र या उसके माता-पिता द्वारा मेडिकल कॉलेज को फीस का भुगतान सामान्य वित्तीय या कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा लेन-देन है। इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 के तहत 'आपराधिक विश्वासघात' (Criminal Breach of Trust) का अपराध मानने के लिए संपत्ति की 'सौंपी गई संपत्ति' (Entrustment) नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच ने मॉरीशस के S.S.R. मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन और चेयरमैन के सेक्रेटरी के खिलाफ एक छात्र की पढ़ाई से जुड़े आरोपों के मामले में आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

    यह आपराधिक विविध याचिका (Criminal Miscellaneous Petition) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर की गई। इसमें अर्गोरा पुलिस स्टेशन केस नंबर 199/2024 (IPC की धारा 406, 420 और 120B के तहत दर्ज) से जुड़ी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई।

    शिकायतकर्ता के बेटे कैरव कीर्तने ने संस्थान के विज्ञापनों से प्रभावित होकर मॉरीशस के S.S.R. मेडिकल कॉलेज में 2019-2024 MBBS सत्र के लिए एडमिशन लिया था।

    अभियोजन पक्ष का आरोप था कि कॉलेज के फैकल्टी और स्टाफ ने क्लासरूम और परीक्षाओं में उसे परेशान और अपमानित किया, जिससे उसकी पढ़ाई पर असर पड़ा। यह भी आरोप लगाया गया कि आपराधिक साजिश के तहत परीक्षा में बैठने की अनुमति के लिए 3,000 USD का भुगतान करने के बावजूद उसे प्री-यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।

    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आखिरकार उसके बेटे को प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा में असफल घोषित कर दिया गया और उसे कॉलेज छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और कॉलेज द्वारा गलत जानकारी देने और अपनाई गई चालों के कारण उन्हें लगभग ₹49.63 लाख का भुगतान करना पड़ा।

    शिकायत के आधार पर अर्गोरा पुलिस स्टेशन ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जब यह मामला हाई कोर्ट के सामने आया, तब जांच चल रही थी और कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि FIR बदला लेने और मेडिकल कॉलेज को देय 16,000 USD की बकाया राशि का भुगतान न करने के लिए दर्ज की गई। यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतकर्ता या उसके बेटे के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई और उसका बेटा अपने बैच के 35 भारतीय छात्रों में से एकमात्र छात्र था, जो फेल हो गया।

    हाईकोर्ट ने सबसे पहले IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी के आरोप की जांच की।

    कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई आरोप नहीं था कि याचिकाकर्ताओं ने व्यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता या उसके बेटे को धोखा दिया, उन्हें संपत्ति देने के लिए उकसाया, या लेन-देन की शुरुआत से ही कोई धोखाधड़ी की।

    बेंच ने यह भी नोट किया कि छात्र की स्थिति निर्विवाद थी कि उसने लगभग साढ़े चार साल तक मेडिकल कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रखी थी।

    इन परिस्थितियों में कोर्ट ने माना कि लेन-देन की शुरुआत से ही धोखाधड़ी का मुख्य तत्व मौजूद नहीं है। फिर, भले ही आरोपों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया जाए, IPC की धारा 420 का मामला नहीं बनता।

    इसके बाद कोर्ट ने IPC की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के आरोप की जांच की।

    इसने देखा कि आपराधिक विश्वासघात के लिए मुख्य आवश्यकता किसी विशिष्ट और सीमित उद्देश्य के लिए आरोपी को संपत्ति या पैसा सौंपना है, जबकि स्वामित्व उस व्यक्ति के पास ही रहता है जो इसे सौंपता है।

    कोर्ट ने माना:

    "इसलिए इस कोर्ट की राय में किसी छात्र या उसके अभिभावक/माता-पिता द्वारा मेडिकल कॉलेज की फीस का भुगतान 'सौंपना' (Entrustment) नहीं कहा जा सकता, जैसा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 405 में इस शब्द का इस्तेमाल किया गया।"

    बेंच ने आगे माना कि संपत्ति सौंपने या सौंपी गई संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं था और, नतीजतन, IPC की धारा 406 के तहत अपराध भी नहीं बनता।

    चूंकि कोर्ट ने पाया कि न तो IPC की धारा 406 और न ही धारा 420 लागू होती है, इसलिए उसने माना कि IPC की धारा 120B के तहत कथित साजिश रचने के लिए आपसी सहमति (Meeting of Minds) का सवाल भी नहीं उठता। यह मानते हुए कि आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अर्गोरा पुलिस स्टेशन केस नंबर 199/2024 से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।

    Case Title: Pratap Narayan Singh @ Rudrapratap Narayan Singh and Anr. v. State of Jharkhand

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