लेबलिंग की गलती से शराब की बोतलों पर गलत बैच नंबर होने पर एक्साइज़ एक्ट के तहत अवैध ट्रांसपोर्ट का आरोप नहीं लगाया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

Shahadat

6 Jun 2026 9:30 PM IST

  • लेबलिंग की गलती से शराब की बोतलों पर गलत बैच नंबर होने पर एक्साइज़ एक्ट के तहत अवैध ट्रांसपोर्ट का आरोप नहीं लगाया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) के अवैध ट्रांसपोर्ट के आरोपी शराब बॉटलिंग यूनिट के मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि वैध परमिट के तहत 400 केस (पेटियों) का ट्रांसपोर्ट केवल इसलिए हिमाचल प्रदेश एक्साइज़ एक्ट की धारा 39 के तहत मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकता कि लेबलिंग की गलती के कारण कुछ बोतलों पर गलत बैच नंबर थे।

    जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:

    "IMFL के 400 बॉक्स वैध परमिट के तहत ट्रांसपोर्ट किए जा रहे थे और कुछ बोतलें अलग-अलग बैच की पाई गईं - हालांकि वे असल में बैच नंबर 15 की थीं, लेकिन बैच नंबर का लेबल लगाने वाले कर्मचारियों ने गलती से उन पर बैच नंबर 9 और 14 की मुहर लगा दी थी। इस गड़बड़ी के कारण अगर कोई अपराध हुआ है तो उसे एक्ट की धारा 43 के तहत अपराध माना जा सकता है..."

    मामला की पृष्ठभूमि

    कोर्ट ने माना कि दो अतिरिक्त बॉक्स के संबंध में धारा 39 के तहत मामला दर्ज करने में कोई गलती नहीं थी, क्योंकि वे बॉक्स बिना परमिट के ट्रांसपोर्ट किए जा रहे थे।

    हालांकि, कोर्ट ने राज्य के इस तर्क को खारिज किया कि याचिकाकर्ता पर धारा 39 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, सिर्फ इसलिए कि परमिट वाले कंसाइनमेंट में कुछ बोतलों पर अलग-अलग बैच नंबर थे।

    एक्साइज़ एक्ट की धारा 66 और 67 की जांच करने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि दो अनधिकृत बॉक्स से संबंधित अपराध समझौता-योग्य (कंपाउंडेबल) था। कोर्ट ने गौर किया कि धारा 67 स्पष्ट रूप से शराब के ट्रांसपोर्ट या कब्ज़े से संबंधित कुछ अपराधों के लिए समझौते की अनुमति देती है।

    इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि जिस FIR को रद्द करने की मांग की गई, उसे बनाए रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा; बल्कि ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से लंबे मुकदमे की परेशानी से गुजरना पड़ेगा, जो वैसे भी विफल ही होगा।

    इस प्रकार, हाईकोर्ट ने FIR रद्द की।

    Case Name: Manik Kumar V/s State of H.P.

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