सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाली अविवाहित महिला से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती: एचपी हाईकोर्ट
Shahadat
20 Aug 2026 8:24 PM IST

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी पद के लिए आवेदन करने वाली अविवाहित महिला से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित ही रहेगी।
कोर्ट ने यह टिप्पणी 'वन मित्र' पद के लिए एक महिला की उम्मीदवारी रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। महिला ने चयन प्रक्रिया के दौरान शादी कर ली थी। कोर्ट ने कहा कि उसकी योग्यता का आकलन आवेदन की तारीख के आधार पर किया जाना चाहिए और बाद में वैवाहिक स्थिति में बदलाव के कारण उसे नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
जस्टिस अजय मोहन गोयल ने कहा: देश में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो आम तौर पर यह कहता हो कि अगर कोई अविवाहित महिला किसी पद के लिए आवेदन करती है, तो उस पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अपनी वैवाहिक स्थिति न बदलने की कानूनी बाध्यता है - खासकर 'वन मित्र' जैसे पदों के लिए।
मामले की पृष्ठभूमि
हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने 'वन मित्र' के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए, जिसकी आखिरी तारीख 30 दिसंबर, 2023 थी। नीतू कुमारी ने 'ड्रंग बीट' पद के लिए आवेदन किया और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट पास करने के बाद पहली रैंक हासिल की।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान, मार्च 2024 में उन्होंने शादी कर ली। नवंबर 2024 में जब उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हुआ, तब तक वह अपने पति के गांव चली गईं और अपने माता-पिता की ग्राम पंचायत में BPL परिवार की सूची में शामिल नहीं थीं। नतीजतन, विभाग ने उन्हें संबंधित अंक नहीं दिए और उस पद के लिए किसी अन्य उम्मीदवार का चयन किया।
इससे नाराज होकर नीतू कुमारी ने अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने और दूसरे उम्मीदवार की नियुक्ति को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी सिर्फ इसलिए रद्द नहीं की जा सकती, क्योंकि उसने भर्ती प्रक्रिया के दौरान शादी कर ली थी। चूंकि आवेदन करते समय वह योग्य थी, इसलिए उसकी योग्यता का आकलन आवेदन की तारीख के आधार पर किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने पाया कि विभाग ने उम्मीदवारों के दस्तावेजों के वेरिफिकेशन में लगभग एक साल का समय लिया और वह याचिकाकर्ता से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहने की उम्मीद नहीं कर सकता। वैवाहिक स्थिति में बदलाव के कारण उसे उस स्थिति का लाभ नहीं छीना जा सकता जो आवेदन करते समय उसके पास थी।
चूंकि याचिकाकर्ता 'ड्रंग बीट' के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार थी, इसलिए कोर्ट ने माना कि उसकी उम्मीदवारी रद्द करना कानूनन गलत था। कोर्ट ने रिजेक्शन का फ़ैसला रद्द किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उसे उसी तारीख से 'वन मित्र' के तौर पर नियुक्त करें, जिस तारीख को दूसरे चुने गए उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई। साथ ही उसे इससे जुड़े आर्थिक और सीनियरिटी के फ़ायदे भी दिए जाएं।
हालांकि, कोर्ट ने प्राइवेट रेस्पॉन्डेंट की नियुक्ति में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि उसकी कोई गलती नहीं थी। विभाग को निर्देश दिया गया कि या तो उसे उसी 'बीट' में काम करने दिया जाए या फिर पास की किसी दूसरी 'बीट' में एडजस्ट किया जाए।
Case Name:Nitu Kuamri v/s State of H.P. & Ors.


