नोटिस की तामील और 15 दिन की भुगतान अवधि पूरी होने से पहले चेक बाउंस की शिकायत दाखिल करना जल्दबाजी: हिमाचल हाईकोर्ट
Amir Ahmad
5 Oct 2026 11:44 AM IST

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की शिकायत तब तक दाखिल नहीं की जा सकती, जब तक चेक जारी करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस की तामील नहीं हो जाती और नोटिस मिलने के बाद भुगतान के लिए निर्धारित 15 दिन की अवधि समाप्त नहीं हो जाती। इससे पहले दाखिल की गई शिकायत समय से पहले मानी जाएगी और उसके आधार पर मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता।
जस्टिस राकेश कैन्थला ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायत उस समय दाखिल की गई, जब नोटिस की तामील की वैधानिक अवधि पूरी नहीं हुई और नोटिस के बाद भुगतान के लिए मिलने वाली 15 दिन की अवधि भी समाप्त नहीं हुई। इसलिए शिकायत समय से पहले दाखिल की गई और मजिस्ट्रेट के पास उसका संज्ञान लेने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।
मामला चेक बाउंस से जुड़ा था। आरोपी के खिलाफ NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत दाखिल की गई। शिकायतकर्ता की ओर से चेक की राशि का भुगतान करने की मांग करते हुए कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन शिकायत उस समय दाखिल कर दी गई जब आरोपी को नोटिस की तामील मानी भी नहीं गई और भुगतान के लिए निर्धारित 15 दिन की अवधि भी पूरी नहीं हुई।
आरोपी ने इसी आधार पर अदालत में कार्यवाही को चुनौती दी और कहा कि शिकायत कानून में निर्धारित जरूरी शर्तें पूरी होने से पहले ही दाखिल कर दी गई।
हाईकोर्ट ने मामले की जांच करते हुए पाया कि शिकायत दाखिल किए जाने की तारीख तक आरोपी को कानूनी मांग नोटिस की तामील मानी जाने की स्थिति नहीं बनी थी। इसके अलावा, नोटिस मिलने के बाद चेक जारी करने वाले व्यक्ति को भुगतान के लिए मिलने वाली 15 दिन की वैधानिक अवधि भी पूरी नहीं हुई।
अदालत ने कहा कि NI Act की धारा 138 के तहत अपराध तभी बनता है जब कानून में निर्धारित सभी जरूरी शर्तें पूरी हो जाएं। नोटिस की तामील और उसके बाद भुगतान के लिए दी गई 15 दिन की अवधि समाप्त होने से पहले शिकायत दाखिल करने पर शिकायतकर्ता के पक्ष में कार्रवाई का कारण ही उत्पन्न नहीं हुआ था।
जस्टिस राकेश कैन्थला ने कहा,
“नोटिस की तामील के बाद निर्धारित 15 दिन की वैधानिक अवधि समाप्त होने से पहले शिकायत दाखिल की गई। इसलिए शिकायत समय से पहले थी और मजिस्ट्रेट के पास उसका संज्ञान लेने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।”
हाईकोर्ट ने इस आधार पर समय से पहले दाखिल की गई शिकायत से उत्पन्न कार्यवाही को कानूनन टिकाऊ नहीं माना और उसे खारिज किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस के मामलों में कानूनी नोटिस की तामील और उसके बाद भुगतान के लिए निर्धारित 15 दिन की अवधि पूरी होना धारा 138 के तहत आगे की आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए जरूरी शर्त है।

