सड़क पर पैदल चलने वाले और मवेशी हों तो वाहन की गति धीमी करना अनिवार्य; ऐसा न करना लापरवाही: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
Praveen Mishra
5 Jan 2026 10:18 AM IST

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक घातक सड़क दुर्घटना मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा है कि जब सड़क पर पैदल यात्री और मवेशी चल रहे हों, तो चालक का कर्तव्य है कि वह वाहन की गति कम करे और सावधानी से ड्राइव करे। ऐसी स्थिति में गति कम न करना और सावधानी न बरतना लापरवाही (नेग्लिजेंस) माना जाएगा।
जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की कि—
“ड्राइवर को वाहन इस तरह चलाना चाहिए कि किसी व्यक्ति या जानवर को चोट न पहुँचे… वर्तमान मामले में आरोपी ने सड़क पर मवेशियों और लोगों की आवाजाही के बावजूद वाहन धीमा नहीं किया, जो लापरवाही को दर्शाता है।”
मामले की पृष्ठभूमि
मई 2006 में आरोपी द्वारा चलाई जा रही एक स्कॉर्पियो गाड़ी ने बनईखेत हेलिपैड के पास एक बच्चे को टक्कर मार दी, जब गाँववाले अपने भैंसों के साथ सड़क पर चल रहे थे। बच्चे को सिर में गंभीर चोट लगी और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
जांच के दौरान पाया गया कि वाहन के आगे के शीशे को नुकसान पहुँचा था, जबकि यांत्रिक परीक्षण में गाड़ी में ऐसी कोई खराबी नहीं मिली जो दुर्घटना का कारण बन सकती थी।
ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत का निष्कर्ष
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को निम्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया—
धारा 279 और 304-ए IPC
धारा 184 और 187 मोटर वाहन अधिनियम
अदालत ने माना कि आरोपी ने लापरवाही से वाहन चलाया, दुर्घटना के बाद मौके से भाग गया और घायल की सहायता नहीं की। बाद में अपीलीय अदालत ने भी इस सजा को बरकरार रखा।
महत्वपूर्ण अवलोकन
भले ही मुखबिर (गवाह) को शत्रुतापूर्ण घोषित किया गया, लेकिन वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से संबंधित उसकी गवाही अविवादित रही और उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी दोहराया कि “तेज़ रफ़्तार” एक सापेक्ष शब्द है, और जहाँ पैदल यात्री व मवेशी मौजूद हों, वहाँ चालक को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
चिकित्सीय साक्ष्य से सिद्ध हुआ कि मृत्यु का कारण सिर पर चोट थी और चोट वाहन दुर्घटना से संभव थी।
निष्कर्ष
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा के विरुद्ध दायर रिवीजन पिटिशन खारिज कर दी।

