श्रीनगर कोर्ट ने JioStar के खिलाफ केबल ऑपरेटर को राहत देने से किया इनकार, पाइरेसी FIR और अवैध पाकिस्तानी चैनल प्रसारण छिपाने पर फटकार
Praveen Mishra
18 April 2026 5:00 PM IST

श्रीनगर की एक अदालत ने स्थानीय केबल ऑपरेटर को दी गई एक्स-पार्टी अंतरिम स्थगन (ad-interim injunction) को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि वादी ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, जिसमें ₹2 करोड़ से अधिक बकाया के कारण सिग्नल का वैध डिस्कनेक्शन, पाइरेसी से जुड़े आपराधिक मामले और प्रतिबंधित पाकिस्तानी चैनलों का अवैध प्रसारण शामिल था। अदालत ने दोहराया कि न्याय पाने के लिए पक्ष को “साफ हाथों” (clean hands) के साथ आना जरूरी है।
यह मामला श्रीनगर स्थित M/s Site Entertainment Network (SEN) द्वारा दायर सिविल सूट से जुड़ा था, जिसमें जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई थी। 20 जनवरी 2026 को अदालत ने पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान, जियोस्टार ने दलील दी कि वादी का उसके साथ कोई प्रत्यक्ष अनुबंध नहीं था और सिग्नल 1 दिसंबर 2025 से बकाया राशि (₹2 करोड़ से अधिक) के कारण कानूनी रूप से बंद कर दिए गए थे। साथ ही, वादी के खिलाफ पाइरेसी और अवैध प्रसारण को लेकर आपराधिक मामला (FIR) भी दर्ज है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संभावित खतरा बताया था, क्योंकि वादी द्वारा बिना अनुमति के डीटीएच सिग्नल का पुनः प्रसारण किया जा रहा था, जो केबल टीवी नियमों और कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है।
कोर्ट ने पाया कि वादी ने इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला भी स्थापित नहीं कर पाया। साथ ही, उसके पक्ष में सुविधा का संतुलन (balance of convenience) भी नहीं था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि वादी ने “साफ हाथों” के सिद्धांत का उल्लंघन किया है, इसलिए उसे कोई राहत नहीं दी जा सकती।
अंततः, अदालत ने 20 जनवरी 2026 को दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश को रद्द कर दिया और मामले की अंतरिम याचिका का निपटारा कर दिया।

