वीडियो में रियल के फलों के रस की पहचान को नहीं दिखाएगा : YouTuber ध्रुव राठी ने डाबर द्वारा कथित अपमान के दावे में कलकत्ता हाईकोर्ट को बताया

  • वीडियो में रियल के फलों के रस की पहचान को नहीं दिखाएगा : YouTuber ध्रुव राठी ने डाबर द्वारा कथित अपमान के दावे में कलकत्ता हाईकोर्ट को बताया

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने डाबर के 'रियल' फ्रूट जूस से संबंधित वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड करने के मामले में पिछले साल विवादों में रहे यूट्यूबर ध्रुव राठी के वकील की दलीलें सुनीं।

    अपने वीडियो में, राठी ने रेडी-टू-सर्व फलों के रस के स्वास्थ्य प्रभावों का विश्लेषण किया और आरोप लगाया कि उनके सेवन से टाइप 2 मधुमेह और बालों का झड़ना होता है, अपने ग्राहकों को ऐसे उत्पादों का सेवन नहीं करने के लिए कहा जाता है। जब वीडियो जारी किया गया था, तो डाबर ने अपने 'रियल' ट्रेडमार्क के अपमान का दावा किया क्योंकि राठी ने अपने वीडियो में केवल आंशिक रूप से अपने ट्रेडमार्क को धुंधला कर दिया था।

    डाबर के दावों के जवाब में, कोर्ट ने शुरू में राठी को अपने वीडियो के आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने का निर्देश दिया था, जो 'रियल' जूस को लक्षित करते थे, लेकिन बाद में अंतरिम आदेशों का पालन नहीं होने के बाद वीडियो को हटाने का निर्देश दिया गया था।

    आज की सुनवाई में राठी के वकील ने जस्टिस अरिंदम मुखर्जी की एकल पीठ से कहा कि यूट्यूबर अपने वीडियो में संशोधन के लिए तैयार है और इसमें रियल के फलों के रस की तस्वीरें डाली जाएंगी ताकि डाबर के ट्रेडमार्क का कोई संदर्भ नहीं दिया जा सके।

    यह तर्क दिया गया था कि मुकदमेबाजी को लड़ने की तुलना में संदर्भों को छिपाना अधिक प्रभावी होगा, जो काफी समय तक जारी रह सकता है।

    इन सुझावों को पीठ और डाबर के वकील ने नोट किया, जिन्होंने निर्देश लेने के लिए समय मांगा।

    कोर्ट ने मामले को 29 फरवरी 2024 को आदेश के लिए रखा है।

    केस: डाबर इंडिया लिमिटेड बनाम ध्रुव राठी और अन्य

    केस नंबर: IA NO. GA/1/2023 in CS/41/2023



    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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