कर्नाटक हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर बलात्कार का आरोप खारिज किया

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर बलात्कार का आरोप खारिज किया

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए बलात्कार के आरोपों को खारिज कर दिया, लेकिन उसे उस महिला के साथ सहमति से बनाए गए रिश्ते से पैदा हुए बच्चे को 10,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया, जिसे उसने कथित तौर पर शादी का वादा करके फुसलाया था।

    जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने राघवेंद्ररड्डी शिवराड्डी नादुविनामणि द्वारा दायर याचिका आंशिक रूप से स्वीकार कर ली और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत बलात्कार के आरोपों को रद्द कर दिया, लेकिन उसके खिलाफ संहिता की धारा 506, 417 और 420 के तहत कार्यवाही जारी रखी।

    कोर्ट ने यह कहा,

    “इस मामले के अजीब तथ्यों में जैसा कि यह पाया गया कि याचिकाकर्ता बच्चे का जैविक पिता है, वह अब मुकदमे के समापन तक अपने पैदा हुए बच्चे की ज़िम्मेदारी से हाथ नहीं उठा सकता। इसलिए मैं याचिकाकर्ता को मुकदमे के समापन तक बच्चे को प्रति माह 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता देने का निर्देश देना उचित समझता हूं।”

    मामले के तथ्यात्मक मैट्रिक्स के अनुसार, दोनों पक्ष रोमांटिक रिश्ते में थे लेकिन शिकायतकर्ता ने बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी कर ली। जैसा कि उसका वैवाहिक जीवन लड़खड़ा रहा था, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने उसे अपने पहले के रिश्ते को जारी रखने का लालच दिया। उसने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता के उससे शादी करने के वादे पर वे शारीरिक संबंध में शामिल हुए और उनका एक बच्चा भी हुआ। हालांकि, याचिकाकर्ता किसी और से शादी करना चाहती थी।

    पीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि सहमति से किये गये कृत्य को 'बलात्कार' नहीं कहा जा सकता। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप को हटाने से इनकार कर दिया। इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता ने निस्संदेह शिकायतकर्ता और उसके पति के बीच तनावपूर्ण संबंधों का फायदा उठाकर शिकायतकर्ता को लालच दिया।

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "बच्चे, मां और याचिकाकर्ता के डीएनए टेस्ट के आलोक में इस तथ्य के प्रति सकारात्मक होने के कारण कि जैविक माता-पिता याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता हैं। शिकायतकर्ता के आरोप तर्कसंगत होंगे... हालांकि यौन शादी के वादे पर किए गए कृत्य पर आईपीसी की धारा 376 लागू नहीं होगी, या जैसा कि इस न्यायालय की समन्वय पीठों द्वारा माना गया है। इस मामले में धोखाधड़ी का अपराध बिना किसी विशेष छान-बीन के अलग किया जा सकता। हालांकि सहमति से किया गया कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएगा।

    कोर्ट ने माना कि आईपीसी की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी का अपराध भी पूरा किया जाएगा, क्योंकि शिकायत में आरोप यह है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता को चार साल तक धमकी दी।

    अपीयरेंस: याचिकाकर्ता के लिए अधिवक्ता के.एल.पाटिल। आर1 के लिए एचसीजीपी वी.एस.कलासुरमठ। आर2 के लिए वकील अर्चना ए मगदुम।

    केस टाइटल: राघवेंद्ररड्डी शिवराड्डी नादुविनामणि और कर्नाटक राज्य

    केस नंबर: आपराधिक याचिका नंबर 100721/2023।

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