PM Modi Degree Row: गुजरात हाईकोर्ट ने ₹25,000 का जुर्माना लगाने वाले आदेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज की
Shahadat
29 Sept 2026 7:18 PM IST

गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार (29 सितंबर) को आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की वह अपील खारिज की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी के खुलासे के मामले में उन पर ₹25,000 का जुर्माना लगाने वाले आदेश को चुनौती दी गई।
केजरीवाल ने मार्च 2023 के सिंगल जज के फैसले के खिलाफ अपील की। उस फैसले में सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) के 2016 का वह निर्देश रद्द किया गया, जिसमें गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की डिग्री से जुड़ी जानकारी देने के लिए कहा गया। यूनिवर्सिटी ने CIC के निर्देश को चुनौती देते हुए सिंगल जज के पास अपील की थी।
चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की डिवीजन बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा:
"मौजूदा मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए चुनौती दिए गए फैसले में अपीलकर्ता की किसी भी दलील में कोई गलती नहीं पाई गई। इसलिए अपील खारिज की जाती है और जुर्माने के संबंध में कोई और गलती नहीं है। स्टे (रोक) के लिए दी गई सिविल एप्लीकेशन भी खारिज की जाती है।"
सिंगल जज ने माना था कि प्रधानमंत्री की एजुकेशनल डिग्री से जुड़ी जानकारी 'राइट टू इंफॉर्मेशन एक्ट' (RTI) की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है, क्योंकि ऐसा कोई बड़ा जनहित नहीं है, जिसके लिए इसका खुलासा करना जरूरी हो। कोर्ट ने केजरीवाल पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया।
पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान, केजरीवाल के वकील ने अपनी जवाबी दलीलों में सिंगल जज के आदेश के पैराग्राफ 40 का जिक्र किया, जिसमें ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एकमात्र बात यह कही गई कि डिग्री वेबसाइट पर उपलब्ध होने के बावजूद उन्होंने इस मामले को "जारी रखा"।
वकील ने कहा था,
"दूसरी तरफ़ से मेरे विद्वान साथी ने अपनी बात यह कहते हुए शुरू की कि उन्होंने डिग्री पहले ही वेबसाइट पर डाल दी। अगर उन्होंने डिग्री पहले ही वेबसाइट पर डाल दी है तो फिर रिट याचिका में कार्रवाई का आधार क्या है? जहां तक मेरी बात है मैं तो बस एक दर्शक की तरह हूं, मैंने किसी चीज़ पर ज़ोर नहीं दिया। मैंने RTI एप्लीकेशन भी दाखिल नहीं की, और ये सभी मानी हुई बातें हैं। इसे 'सुओ-मोटो' (खुद से संज्ञान लेना) के तौर पर लिया गया और मुझे प्रतिवादी बनाया गया। हमारा कहना है कि हमने कभी किसी चीज़ पर ज़ोर नहीं दिया। मुझे पैरा 40 से शिकायत है।"
उन्होंने दलील दी थी कि केजरीवाल पर एकमात्र आरोप यह है कि यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद, उन्होंने इस मामले पर "ज़ोर" दिया।
वकील ने आगे कहा कि यूनिवर्सिटी ने खुद यह बात कही कि उसकी वेबसाइट पर जो जानकारी उपलब्ध थी, वह "डिग्री का रिकॉर्ड" था, न कि खुद डिग्री।
इससे पहले की सुनवाई में, यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि केजरीवाल पर और जुर्माना लगाया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि RTI Act का गलत इस्तेमाल न हो और सरकारी अधिकारियों को ऐसे अनुरोधों से निपटने में अपने काम के कीमती घंटे बर्बाद न करने पड़ें, जिनसे एक्ट का मकसद पूरा नहीं होता।
Case title: ARVIND KEJRIWAL v/s GUJARAT UNIVERSITY & ORS.

