मकान गिराने की आशंका पर दायर याचिका गुजरात हाईकोर्ट ने निपटाई, कहा- कार्रवाई से पहले कानून के अनुसार नोटिस दे निगम

Praveen Mishra

5 Aug 2026 4:06 PM IST

  • मकान गिराने की आशंका पर दायर याचिका गुजरात हाईकोर्ट ने निपटाई, कहा- कार्रवाई से पहले कानून के अनुसार नोटिस दे निगम

    गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत नगर निगम (Surat Municipal Corporation) द्वारा मकान तोड़े जाने की आशंका को लेकर दायर एक याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने यह आदेश तब पारित किया जब नगर निगम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल याचिकाकर्ता के मकान को ध्वस्त करने का उसका कोई इरादा नहीं है। निगम ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई की जाती है तो संबंधित व्यक्ति को विधि के अनुसार नोटिस जारी किया जाएगा और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

    याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा यह आशंका जताते हुए खटखटाया था कि सूरत नगर निगम उसके आवासीय मकान को भी गिरा सकता है। उसने बताया कि उसके घर से सटे परिसर को निगम द्वारा पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है, जिसके कारण उसे अपने मकान के खिलाफ भी कार्रवाई की आशंका है।

    सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि ध्वस्तीकरण से जुड़ा व्यापक विवाद पहले से ही स्पेशल सिविल एप्लिकेशन नंबर 8712/2026 में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता की संपत्ति को गिराने की कोई योजना नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि यदि भविष्य में निगम कोई कार्रवाई करने का निर्णय लेता है तो वह कानून के अनुरूप नोटिस जारी करेगा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेगा।

    नगर निगम के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस निखिल एस. करियल ने कहा कि अदालत को इस मामले में फिलहाल किसी अन्य आदेश की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि संबंधित संपत्ति के विरुद्ध कोई दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई की जाती है तो नगर निगम उसे पूरी तरह कानून के अनुसार ही अंजाम देगा।

    इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।

    गौरतलब है कि सूरत के नासिर नगर में किए गए ध्वस्तीकरण अभियान से जुड़े एक अलग मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने पहले मौखिक टिप्पणी करते हुए कार्रवाई को "पूरी तरह अवैध" बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि इस कार्रवाई के कारण लगभग 100 परिवार विस्थापित हो गए थे।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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