भगवान बुद्ध की तस्वीर वाली साड़ी बेचने पर FIR, गुजरात हाईकोर्ट ने किया रद्द; कहा- हर धार्मिक चित्रण को 295A के तहत अपराध नहीं माना जा सकता

  • भगवान बुद्ध की तस्वीर वाली साड़ी बेचने पर FIR, गुजरात हाईकोर्ट ने किया रद्द; कहा- हर धार्मिक चित्रण को 295A के तहत अपराध नहीं माना जा सकता

    गुजरात हाईकोर्ट ने साड़ी और टेक्सटाइल सामग्री पर भगवान गौतम बुद्ध की तस्वीर वाले प्रिंट बेचने के आरोप में दर्ज FIR को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल किसी देवी-देवता या पूजनीय धार्मिक प्रतीक की तस्वीर को कपड़े पर प्रिंट करना या ऐसे कपड़े बेचना, अपने आप में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस पीएम रावल ने कहा कि IPC की धारा 295A हर प्रकार के कथित धार्मिक अपमान को दंडित नहीं करती। इस धारा के तहत अपराध तभी बनता है जब किसी धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने के पीछे जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा हो।

    मामला सूरत के एक साड़ी व्यापारी से जुड़ा था, जिसके खिलाफ भगवान गौतम बुद्ध की तस्वीर वाली साड़ियों और कपड़ों की बिक्री को लेकर धारा 295A और 114 IPC के तहत FIR दर्ज की गई थी। आरोप था कि तस्वीरें साड़ी के निचले हिस्से, बॉर्डर या पल्लू पर इस तरह थीं कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और भगवान बुद्ध का अपमान हुआ।

    हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि इनमें ऐसा कुछ नहीं दिखता जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान किया।

    कोर्ट ने कहा कि व्यापारी सामान्य व्यावसायिक गतिविधि के तहत बाजार में प्रचलित डिजाइन के अनुसार साड़ियों और ड्रेस मटेरियल का कारोबार कर रहा था। धार्मिक प्रतीकों वाले टेक्सटाइल की व्यावसायिक बिक्री, यदि उसके साथ कोई भड़काऊ बयान, जानबूझकर अपमान या धार्मिक विश्वास को नीचा दिखाने का प्रदर्शनीय इरादा नहीं है, तो धारा 295A के तहत आपराधिक अपराध नहीं बनती।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 295A लागू करने के लिए criminal mens rea यानी आपराधिक मानसिक तत्व आवश्यक है। केवल यह तथ्य कि किसी धार्मिक प्रतीक की तस्वीर कपड़े के निचले हिस्से या पल्लू पर है, अपने आप में दुर्भावनापूर्ण धार्मिक अपमान साबित नहीं करता।

    हाईकोर्ट ने कहा कि FIR में लगाए गए आरोपों को सही मानकर भी आरोपी के खिलाफ धारा 295A के तहत prima facie aggravated insult to religion का मामला नहीं बनता।

    इस आधार पर गुजरात हाईकोर्ट ने व्यापारी के खिलाफ दर्ज FIR को क्वैश कर दिया।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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