POCSO ट्रायल शुरू होने तक पीड़िता बालिग हो जाए, तब भी बंद कमरे में होगी गवाही: गुजरात हाईकोर्ट

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    गुजरात हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कथित यौन अपराध के समय पीड़िता नाबालिग थी, लेकिन POCSO मामले का ट्रायल शुरू होने तक वह 18 वर्ष की हो गई, तो भी उसकी गवाही बंद कमरे (In-camera Proceedings) में दर्ज करने संबंधी POCSO Act के प्रावधान लागू रहेंगे।

    जस्टिस मूल चंद त्यागी ने कहा कि केवल इस आधार पर कि ट्रायल शुरू होने के समय पीड़िता 18 वर्ष से अधिक उम्र की हो चुकी थी, POCSO Act के तहत उसकी गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया लागू होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि पीड़िता अब बालिग हो चुकी है। इसलिए उसे कानून के अनुसार अभियोजन पक्ष की गवाह से प्रभावी ढंग से जिरह करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

    दूसरी ओर, राज्य सरकार ने दलील दी कि घटना के समय पीड़िता की उम्र लगभग 17 वर्ष और 11 महीने थी। इसलिए मामले में POCSO Act के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।

    राज्य की ओर से कहा गया कि विशेष POCSO कोर्ट को पीड़िता की गवाही दर्ज करते समय इस कानून के प्रावधानों का पालन करना चाहिए।

    अपराध के समय पीड़िता की उम्र 17 साल 11 महीने थी

    हाईकोर्ट ने गौर किया कि मामले में FIR 15 मार्च 2026 को दर्ज की गई थी। FIR के अनुसार, कथित अपराध के समय पीड़िता की उम्र 17 वर्ष और 11 महीने थी।

    कोर्ट ने कहा कि मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत भी अपराध दर्ज किया गया था। इसलिए POCSO Act की धारा 33(2), 36 और 37 के प्रावधान लागू होंगे।

    ट्रायल शुरू होने तक बालिग होने से नहीं खत्म होगी कानूनी सुरक्षा

    कोर्ट ने कहा कि ट्रायल शुरू होने के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो जाना, POCSO Act के तहत उसकी गवाही दर्ज करने से संबंधित प्रक्रियात्मक सुरक्षा को समाप्त नहीं करता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अहमदाबाद (ग्रामीण) की विशेष POCSO कोर्ट के पहले के आदेश को रद्द कर दिया।

    कोर्ट ने विशेष POCSO कोर्ट को निर्देश दिया कि वह POCSO Act की धारा 33(2), 36 और 37 के अनुसार पीड़िता की गवाही बंद कमरे में दर्ज करे।

    इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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