सिर्फ मैरिज रजिस्ट्रेशन से हिंदू विवाह वैध नहीं होता, सप्तपदी समेत आवश्यक रस्में अनिवार्य: गुजरात हाईकोर्ट

Praveen Mishra

1 July 2026 11:03 AM IST

  • सिर्फ मैरिज रजिस्ट्रेशन से हिंदू विवाह वैध नहीं होता, सप्तपदी समेत आवश्यक रस्में अनिवार्य: गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत केवल विवाह का रजिस्ट्रेशन हो जाने से शादी वैध नहीं हो जाती। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह तभी कानूनी रूप से मान्य होगा, जब कानून के अनुसार आवश्यक वैवाहिक रस्में, विशेष रूप से जहां लागू हो वहां सप्तपदी (सात फेरे/सात कदम), विधिवत संपन्न की गई हों।

    जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कथित विवाह को शुरुआत से ही शून्य (Null and Void Ab Initio) घोषित कर दिया।

    मामले में पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र के आधार पर वैध विवाह की प्रथम दृष्टया धारणा मानते हुए मामले की पूर्ण सुनवाई का निर्देश दिया गया था।

    हाईकोर्ट ने पाया कि कथित पत्नी ने स्वयं लिखित जवाब में स्वीकार किया था कि दोनों के बीच कोई वैवाहिक रस्म या समारोह आयोजित नहीं हुआ था और न ही कोई विधिसम्मत विवाह संपन्न हुआ था। उसने यह भी माना था कि दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ नहीं रहते।

    अदालत ने कहा कि जब आवश्यक वैवाहिक रस्में संपन्न ही नहीं हुईं, तो विवाह पंजीकरण से उत्पन्न वैध विवाह की धारणा स्वतः समाप्त हो जाती है। धारा 8 के तहत रजिस्ट्रेशन केवल पहले से विधिवत संपन्न विवाह का प्रमाण होता है, वह अपने आप किसी विवाह को वैध नहीं बना सकता।

    फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह एक 'संस्कार' है, केवल "गीत-संगीत, दावत या व्यावसायिक लेन-देन" नहीं। युवाओं को विवाह की पवित्रता और जिम्मेदारियों को समझकर ही इस संस्था में प्रवेश करना चाहिए।

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