बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए घरों पर चलाया बुलडोजर: गुजरात हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत पर लगाया ₹1.20 लाख का जुर्माना
Praveen Mishra
6 Nov 2026 12:22 PM IST

गुजरात हाईकोर्ट ने आनंद जिले की एक ग्राम पंचायत पर ₹1,20,000 का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि ग्राम पंचायत ने गांव में कुछ लोगों के घरों को ध्वस्त करने से पहले कानून द्वारा निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
जस्टिस निखिल एस. करियल ने कहा कि भले ही संबंधित निर्माण सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण हो सकता है और ग्राम पंचायत के पास उसे हटाने का आधार था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी का मकान ध्वस्त कर सकती है।
कोर्ट ने प्रत्येक याचिकाकर्ता को ₹20,000 की दर से मुआवजा देने का निर्देश दिया। साथ ही आनंद के जिला विकास अधिकारी (DDO) को मामले की जांच करने और उचित सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
क्या था मामला?
यह मामला आनंद जिले के समरखा गांव का है, जहां कुछ लोगों ने ग्राम पंचायत पर उनके मकानों और संपत्तियों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए बिना ध्वस्त करने का आरोप लगाया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विवादित निर्माण उनकी निजी जमीन पर स्थित थे, जबकि ग्राम पंचायत उन्हें सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण बता रही थी।
जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए जिला निरीक्षक भूमि अभिलेख (DILR) द्वारा भूमि की माप कराई गई। DILR की रिपोर्ट में कहा गया कि जिन संपत्तियों को ध्वस्त किया गया, वे याचिकाकर्ताओं की निजी जमीन पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक सड़क पर स्थित थीं।
इससे पहले 13 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट की एक समन्वय पीठ ने DILR, आनंद को रिपोर्ट के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
ग्राम पंचायत ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया
हाईकोर्ट ने पाया कि ग्राम पंचायत का कहना था कि उसने याचिकाकर्ताओं को तीन बार नोटिस जारी किए थे और उसके बाद 1 जून 2026 को प्रस्ताव संख्या 220 पारित कर विवादित निर्माण को ध्वस्त करने का निर्णय लिया था।
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने 20 मई 2026 को विस्तृत अभ्यावेदन देकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत के प्रस्ताव में उनकी इस दलील पर कोई विचार नहीं किया गया कि विवादित संपत्तियां निजी जमीन पर स्थित हैं, न कि सार्वजनिक सड़क पर।
कोर्ट ने यह भी पाया कि प्रस्ताव में केवल 256 वर्ग मीटर जमीन पर अतिक्रमण का उल्लेख किया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर विचार किए जाने का कोई संकेत नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि ग्राम पंचायत ने गुजरात पंचायत अधिनियम की धारा 105 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जाने का दावा भी नहीं किया।
इसके अलावा, जिस प्रस्ताव के आधार पर मकानों को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया था, उसकी प्रति भी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
नोटिस में भी प्रस्ताव का जिक्र नहीं था
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि ग्राम पंचायत ने 5 जून 2026 को याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर 8 जून 2026 को निर्माण ध्वस्त करने की सूचना दी थी, लेकिन उस नोटिस में 1 जून 2026 को पारित प्रस्ताव का कोई उल्लेख नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि यह समझ से परे है कि किसी व्यक्ति की संपत्ति ध्वस्त करने का निर्णय लेने वाली ग्राम पंचायत अपने नोटिस में उस प्रस्ताव का उल्लेख तक न करे, जिसके आधार पर ध्वस्तीकरण किया जाना था।
कोर्ट ने कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना प्रथम दृष्टया स्पष्ट है और इस संबंध में सुधारात्मक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
ग्राम पंचायत पर ₹1.20 लाख का जुर्माना
हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही DILR की स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार संबंधित निर्माण सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण थे, लेकिन ग्राम पंचायत को ध्वस्तीकरण से पहले कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक था।
कोर्ट ने ग्राम पंचायत पर कुल ₹1,20,000 का जुर्माना लगाया। यह राशि छह याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से ₹20,000 प्रति व्यक्ति की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
DDO को जांच करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने आनंद के जिला विकास अधिकारी (DDO) को यह जांच करने का निर्देश दिया कि क्या ग्राम पंचायत ने 1 जून 2026 को ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव वास्तव में ध्वस्तीकरण से पहले पारित किया था या फिर बाद में उसे तैयार किया गया अथवा पिछली तारीख में पारित दिखाया गया।
कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को जांच के आधार पर उचित कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने ध्वस्तीकरण को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग पर फिलहाल कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। कोर्ट की सभी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया हैं और DDO जांच के दायरे में आवश्यकतानुसार बदलाव कर सकते हैं।

