हरेन पांड्या मर्डर केस में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर 6 महीने के अंदर फ़ैसला करे राज्य: गुजरात हाईकोर्ट
Shahadat
26 Jun 2026 8:56 AM IST

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह मोहम्मद असगर अली की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर छह महीने के अंदर फ़ैसला ले। असगर अली को राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
जस्टिस एमआर मेंगडे ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में पेश की गई जेल की रिपोर्ट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की सज़ा कम करने के मामले पर विचार करने की प्रक्रिया चल रही है। सलाहकार समिति की राय मिल गई है और इसे जल्द ही संबंधित अधिकारी के सामने पेश किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा,
"इन बातों को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारी याचिकाकर्ता की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर कानून के अनुसार जल्द से जल्द, और हो सके तो आदेश मिलने की तारीख से 6 महीने के भीतर उचित फ़ैसला लें। इस टिप्पणी के साथ यह अर्ज़ी निपटा दी जाती है। IA (अंतरिम अर्ज़ी) भी निपटा दी जाती है।"
पांड्या की हत्या 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद में लॉ गार्डन के पास सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर कर दी गई।
CBI के अनुसार, उनकी हत्या राज्य में 2002 के सांप्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए की गई। CBI और राज्य पुलिस ने गुजरात हाई कोर्ट के 29 अगस्त 2011 के बरी करने के फ़ैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की।
ट्रायल कोर्ट ने जून 2007 में पांड्या की हत्या के लिए 12 लोगों को दोषी ठहराया। हालांकि, हाईकोर्ट ने 2011 में उन सभी को बरी कर दिया और कहा कि जांच "खराब" और "गलत दिशा में" की गई।
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के मामले में आरोपियों की दोषसिद्धि और सज़ा को बहाल कर दिया।
आरोपियों को पहले एक विशेष POTA कोर्ट ने एक बड़ी साज़िश के लिए दोषी ठहराया। यह फ़ैसला मुख्य आरोपी असगर अली के बयान के आधार पर लिया गया, जिसने 2002 के दंगों का बदला लेने के लिए गुजरात के प्रमुख VHP और अन्य हिंदू नेताओं पर हमला करने की योजना की बात स्वीकार की थी। अन्य आरोपी हैं - मोहम्मद रऊफ, मोहम्मद परवेज अब्दुल कयूम शेख, परवेज खान पठान उर्फ अतहर परवेज, मोहम्मद फारूक उर्फ हाजी फारूक, शाहनवाज गांधी, कलीम अहमदा उर्फ कलीमुल्लाह, रेहान पुथावाला, मोहम्मद रियाज सरेसवाला, अनीज माचिसवाला, मोहम्मद यूनुस सरेसवाला और मोहम्मद सैफुद्दीन।
मामले की जांच पहले राज्य पुलिस ने की लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया।
Case title: MOHAMMED ASGARALI MOHAMMAD VAJIRALI v/s STATE OF GUJARAT & ORS

