निजी जमीन पर घर तोड़ने पर गुवाहाटी हाईकोर्ट सख्त, कहा- आपदा प्रबंधन कानून के दुरुपयोग की प्रथमदृष्टया आशंका
Amir Ahmad
16 Sept 2026 12:24 PM IST

गोलपाड़ा में निजी जमीन पर बने लोगों के मकान गिराने की कार्रवाई पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए । कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों से प्रथमदृष्टया ऐसा नहीं लगता कि मकान गिराने के लिए कोई आसन्न खतरा मौजूद था। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का दुरुपयोग किया गया।
मामला गोलपाड़ा जिले के माटिया अंचल कार्यालय की ओर से जारी नोटिस से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने ही कृषि भूखंडों पर बने मकानों को 24 घंटे के भीतर गिराने की धमकी दी गई। नोटिस में कहा गया कि ऐसा नहीं करने पर असम भूमि एवं राजस्व विनियमन, 1886 के तहत बनाए गए बंदोबस्त नियमों के नियम 6 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 30(2)(v) और 34(k) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर ऐसा कौन-सा “आसन्न खतरा” है, जिसके कारण याचिकाकर्ताओं के आवासीय मकानों को गिराने की जरूरत पड़ी।
11 सितंबर के आदेश में जस्टिस देवाशीष बरुआ ने कहा कि राज्य की ओर से पेश किए गए निर्देशों और दस्तावेजों से प्रथमदृष्टया यह नहीं दिखता कि निजी जमीन पर बने मकानों को गिराने जैसी कठोर कार्रवाई के लिए कोई आसन्न खतरा मौजूद है।
कोर्ट ने कहा,
“बल्कि प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का दुरुपयोग किया गया।”
कोर्ट ने राज्य की ओर से पेश जांच रिपोर्ट, 20 जून 2026 की जांच रिपोर्ट, 23 जून 2026 के जिला आयुक्त के आदेश और 9 सितंबर 2026 की बिंदुवार टिप्पणियों को रिकॉर्ड पर लिया।
हाईकोर्ट ने जिला आयुक्त और अंचल अधिकारी को मामले में अलग-अलग हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल अतिरिक्त हलफनामे में मकान गिराए जाने की तस्वीरें और इससे हुए नुकसान का विवरण पेश किया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस अतिरिक्त हलफनामे पर जवाब मांगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सुनवाई के दौरान यह पाया जाता है कि जिला आयुक्त और अंचल अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई कानून के अधिकार के तहत अधिकृत नहीं थी, तो मकान मालिकों को हुए नुकसान के मुआवजे के सवाल पर भी विचार किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं की जमीन पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश बरकरार रखा।


