कार्बन उत्सर्जन का बोझ गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाला जाता है: पीएम मोदी
Shahadat
19 Sept 2026 8:42 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन के लिए अक्सर विकासशील देशों को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा से भी कम है और विकसित देशों का उत्सर्जन छह गुना अधिक है।
पीएम मोदी नई दिल्ली में 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' (The Future of Environment and Climate Dynamics) पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अक्सर कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाल दी जाती है, जबकि सच्चाई यह है कि भारत का योगदान वैश्विक औसत से आधे से भी कम है।
उन्होंने कहा:
"हम जानते हैं कि अक्सर कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाल दी जाती है। ग्लोबल साउथ के मेरे सहयोगी यहां बैठे हैं। जबकि ऐतिहासिक सच्चाई यह है कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम है। विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में छह गुना अधिक है। भारत वैश्विक मंचों पर इस तथ्य को मजबूती से रखता है।"
उन्होंने बताया कि पेरिस में COP-21 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज) के दौरान इन मुद्दों को मजबूती से उठाया गया, जहां भारत ने PM द्वारा लिखित पुस्तक 'कन्वीनिएंट एक्शन एंड कंटिन्यूटी फॉर चेंज' (Convenient Action and Continuity for Change) भी लॉन्च की थी। पीएम मोदी ने गर्व के साथ घोषणा की कि भारत एकमात्र G20 देश है, जिसने पेरिस COP-21 में किए गए सभी वादों को समय से पहले पूरा किया।
इसके अलावा, उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि कार्बन उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए देश में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पीएम ने आगे कहा,
"दुनिया को साथ लेकर हम पर्यावरण संरक्षण के लिए नए मानक स्थापित कर रहे हैं, चाहे वह 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' का विचार हो या 'इंटरनेशनल सोलर अलायंस' या 'ग्लोबल बायो फ्यूल अलायंस' या इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस या मिशन लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट। आज, भारत पर्यावरण संरक्षण के अपने प्राचीन विचारों को आधुनिक दृष्टिकोण में पिरोने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।"
पीएम मोदी ने स्वच्छ गतिशीलता (clean mobility), ऊर्जा क्षेत्र, सामाजिक ऊर्जा क्षमता, कार्बन उत्सर्जन पर रोक, परमाणु ऊर्जा उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख किया, जिनमें "असाधारण प्रगति" हुई है और जो आज दुनिया में सकारात्मक चर्चा का विषय हैं। उन्होंने कहा: “आंकड़े देखिए: 12 साल पहले, भारत की सोलर एनर्जी क्षमता लगभग 2 गीगावाट थी। आज यह 160 गीगावाट से ज़्यादा हो गई है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के तहत, हमने घरों को सोलर पावर जेनरेशन का केंद्र बनाने का मिशन शुरू किया।
इस योजना के तहत अब तक 50 लाख से ज़्यादा घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। यह दुनिया के कई देशों में कुल घरों की संख्या से भी ज़्यादा है। इसके लिए सरकार ने प्रति घर 80,000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी है। कुसुम योजना के तहत सरकार ने 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाने का काम किया। हमने महत्वाकांक्षी 'वन नेशन, वन ग्रिड' प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। इतना ही नहीं, घरों में LED बल्बों से बिजली की बचत हुई। इन कोशिशों के नतीजे आज हमारे सामने हैं; इससे 20 करोड़ कार्बन उत्सर्जन को रोका गया।"
पीएम मोदी ने कहा है कि भारत ने हाइड्रो एनर्जी क्षमता में काफी बढ़ोतरी की है, और अब देश न्यूक्लियर एनर्जी जेनरेशन पर तेज़ी से काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा,
"जो लोग न्यूक्लियर एनर्जी पर काम आगे बढ़ाने पर लंबे-चौड़े भाषण देते हैं, वे इसे रोकने के लिए कोर्ट तक चले जाते हैं। इस सेक्टर में प्राइवेट प्लेयर्स को लाने का रास्ता भी बनाया गया। इन कोशिशों की वजह से भारत की नॉन-फॉसिल क्षमता लगभग चार गुना बढ़ गई।"
उन्होंने कोयले के साफ़-सुथरे इस्तेमाल के लिए कोल गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने और EV गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर सरकार की कोशिशों का भी ज़िक्र किया।
आगे कहा गया,
"भारत क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर में तेज़ी से काम कर रहा है। कुछ दिन पहले ही भारत की पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन ने अपना सफ़र शुरू किया और यह दुनिया का सबसे लंबा हाइड्रोजन ट्रेन रूट है। यह क्लीन मोबिलिटी के एक नए दौर की शुरुआत है। 12 सालों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में लगभग 950 गुना बढ़ोतरी हुई। 2014 से पहले भारत में EV की बिक्री 3,000 से भी कम थी, जबकि पिछले साल भारत में 2.5 लाख EV बेची गईं। भारत पूरे जोश के साथ EV के मौक़े को अपना रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि भारत अब उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जिनके पास 1,000 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क है, क्योंकि हमारे देश में 20 से ज़्यादा शहरों में मेट्रो नेटवर्क चल रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अब अपने सांस्कृतिक अनुभवों के आधार पर प्रकृति और पर्यावरण के मामले में दुनिया का मार्गदर्शन कर रहा है। यह आधुनिक जलवायु चुनौतियों का समाधान तो दे ही रहा है। साथ ही दुनिया से सामूहिक प्रयासों का आह्वान भी कर रहा है।
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन दो दिन का कार्यक्रम है। सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने भी भाषण दिया। इस मौक़े पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव भी मौजूद थे। इस सम्मेलन में 17 देश हिस्सा ले रहे हैं।

