'क्या मीटिंग्स पर पूरी तरह बैन लगाना आर्टिकल 19 का उल्लंघन नहीं होगा?': हाईकोर्ट ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन पर रोक को लेकर DU और दिल्ली पुलिस को जारी किया नोटिस
Shahadat
12 March 2026 5:42 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 मार्च) को याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंदर सार्वजनिक मीटिंग्स पर बैन लगाने वाले आदेशों को चुनौती दी गई।
बता दें, 17 फरवरी को यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर ने एक महीने के लिए यूनिवर्सिटी कैंपस में किसी भी तरह की सार्वजनिक मीटिंग्स, जुलूस, प्रदर्शन और विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था।
सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच को बताया गया कि पुलिस सब-डिवीजन सिविल लाइंस द्वारा CrPC की धारा 144 के तहत भी एक आदेश जारी किया गया था, जिसे अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था।
कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें 17 फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए उसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह आदेश भारत के संविधान के आर्टिकल 19 (1) (a), (b) और (d) का उल्लंघन करता है। इसके बाद किरोड़ी मल कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज ने भी इसी तरह के निर्देश जारी किए, जिन्हें याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी थी।
यूनिवर्सिटी के वकील ने कोर्ट को बताया कि किरोड़ी मल कॉलेज तो सिविल लाइंस सब-डिवीजन के अंतर्गत आता है, लेकिन दयाल सिंह कॉलेज नहीं आता।
इस बीच याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ज़मीनी हकीकत यह है कि इस आदेश के चलते कॉलेज कैंपस के अंदर स्टूडेंट चाय या खाने के स्टॉल पर भी खड़े नहीं हो पा रहे हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि आदेश में सार्वजनिक मीटिंग्स पर बैन लगाया गया, लेकिन शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
वहीं, दिल्ली पुलिस की वकील ने निर्देशों के आधार पर कोर्ट को बताया कि पुलिस के पास "खुफिया जानकारी थी कि स्टूडेंट्स के दो गुटों के बीच टकराव की आशंका है" और पहले भी एक घटना में एक पुलिस थाने का "घेराव" किया गया। ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए ही सिविल लाइंस क्षेत्र की पुलिस ने CrPC की धारा 144 के तहत आदेश जारी किया।
हालांकि, कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,
"कानून-व्यवस्था बनाए रखें। यही आपका काम है। आदेश की पहली लाइन देखें... बिना किसी रोक-टोक के (मीटिंग्स की) अनुमति न दें..."।
कोर्ट ने आगे कहा कि कुछ पाबंदियों के साथ मीटिंग्स की अनुमति दी जा सकती है। इस पर पुलिस की वकील ने कहा कि वह इस संबंध में निर्देश लेंगी।
कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,
"अगर कोई किसी भी तरह की हिंसा कर रहा है तो उस पर कार्रवाई करें। लेकिन मीटिंग्स पर इस तरह का पूरी तरह से बैन लगाना, क्या यह आर्टिकल 19 का उल्लंघन नहीं होगा?... इसमें (आर्टिकल 19(2)) कहा गया कि 'उचित पाबंदियां' लगाई जा सकती हैं। इसलिए उचित पाबंदियां ही लगाएं।"
यूनिवर्सिटी के वकील से कोर्ट ने कहा:
"इस आदेश को देखिए। पब्लिक मीटिंग्स, रैलियां, जुलूस, प्रदर्शन, विरोध, धरना या किसी भी तरह का आंदोलन... इसमें शांतिपूर्ण पब्लिक मीटिंग्स और शांतिपूर्ण विरोध भी शामिल हो जाएंगे। आप इसे किस हद तक सही ठहरा सकते हैं?"
जब यूनिवर्सिटी के वकील ने कहा कि वहां CrPC की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी तो कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,
"आपको यह आदेश जारी करने की क्या ज़रूरत थी? अगर कोई धारा 144 का उल्लंघन करता... तो पुलिस अधिकारियों के पास कार्रवाई करने का अधिकार था। आपने यह आदेश क्यों जारी किया?... अगर कोई धारा 144 का उल्लंघन करता, तो उसके नतीजे भुगतने पड़ते।"
कुछ देर तक मामले की सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया और दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, दोनों कॉलेजों और अन्य प्रतिवादियों से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अब और समय नहीं दिया जाएगा।
सुनवाई खत्म करने से पहले कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि BNSS की धारा 163 (CrPC की धारा 144) के तहत कोई आदेश पारित करने से पहले कुछ "शर्तों" का पूरा होना ज़रूरी है। कोर्ट ने आगे कहा कि BNSS की धारा 163 और CrPC की धारा 144 की भाषा एक जैसी है और "पारी-मटेरिया" (समान विषय-वस्तु) है।
कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि आज़ादी का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। साथ ही कोर्ट इस मामले में सिर्फ इसलिए दखल दे रहा है, क्योंकि इसमें आर्टिकल 19 का मामला जुड़ा हुआ है।
इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।
Case title: UDAY BHADORIYA v/s UNIVERSITY OF DELHI & ORS

