उन्नाव रेप पीड़िता ने कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ और सबूत पेश करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

Shahadat

15 Jan 2026 1:08 PM IST

  • उन्नाव रेप पीड़िता ने कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ और सबूत पेश करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

    उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पूर्व उत्तर प्रदेश विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ और सबूत पेश करने की गुहार लगाई, जिन्हें इस मामले में दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।

    पीड़िता की अर्ज़ी जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीज़न बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई, जिसने इसे 25 फरवरी को सुनवाई के लिए लिस्ट किया।

    सेंगर की सज़ा 23 दिसंबर, 2025 को कोऑर्डिनेट बेंच ने सस्पेंड की और उन्हें ज़मानत दी थी। हालांकि, कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर, 2025 को इस आदेश पर रोक लगाई।

    पीड़िता ने 2020 में सेंगर द्वारा दायर अपील में सबूत पेश करने के लिए यह नई अर्ज़ी दायर की, जिसमें उन्होंने अपनी सज़ा और ट्रायल कोर्ट के उम्रकैद के आदेश को चुनौती दी। कोर्ट ने गुरुवार कहा कि अपील सुनवाई के आखिरी स्टेज में है।

    पीड़िता की ओर से पेश हुए वकील महमूद प्राचा ने कहा कि पीड़िता और सबूत रिकॉर्ड करने और स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार अपनी जन्मतिथि सहित और दस्तावेज़ पेश करने की गुहार लगा रही है।

    अर्ज़ी पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि अर्ज़ी के साथ कोई दस्तावेज़ अटैच नहीं किया गया। इसलिए उसने पीड़िता को 31 जनवरी तक संबंधित दस्तावेज़ दाखिल करने का निर्देश दिया।

    कोर्ट ने सेंगर के साथ-साथ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को भी दो हफ़्ते के अंदर अर्ज़ी पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    सीनियर वकील एन हरिहरन सेंगर की ओर से पेश हुए।

    बता दें, सेंगर की सज़ा सस्पेंड करते समय कोर्ट ने मुख्य रूप से कहा कि POCSO Act की धारा 5(c) के तहत अपराध उनके खिलाफ नहीं बनता।

    कोर्ट ने कहा कि पहली नज़र में यह अपराध एक्ट की धारा 5 के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट के दायरे में नहीं आता है।

    कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अपीलकर्ता सेंगर को POCSO Act की धारा 5(c) या भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(b) के मकसद से "सरकारी कर्मचारी" के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। ट्रायल कोर्ट ने पहले सेंगर को गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट के लिए दोषी ठहराया, इस आधार पर कि वह सरकारी कर्मचारी की परिभाषा के दायरे में आते हैं। सेंगर को 2019 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में एक नाबालिग लड़की से रेप के मामले में एक स्पेशल CBI कोर्ट ने दोषी ठहराया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई।

    इस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा था, जिसमें पीड़िता और उसके परिवार ने पूर्व विधायक और उसके साथियों पर लगातार उत्पीड़न और धमकी देने का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों पर हमलों से जुड़े कई मामलों की भी जांच की थी।

    सेंगर पीड़िता के पिता की गैर-इरादतन हत्या से जुड़े एक अलग मामले में 2020 में मिली 10 साल की सज़ा भी काट रहा है।

    Title: Kuldeep Singh Sengar v. CBI

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