टेबल टेनिस फेडरेशन की मान्यता निलंबित करना प्रथम दृष्टया मनमाना: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
Amir Ahmad
16 Oct 2026 5:15 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय टेबल टेनिस महासंघ (TTFI) की राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में मान्यता निलंबित करने के केंद्र सरकार के फैसले को प्रथम दृष्टया मनमाना बताया।
जस्टिस अमित महाजन ने महासंघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
याचिका में केंद्र सरकार के 12 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत महासंघ की मान्यता निलंबित कर दी गई।
विवादित आदेश में भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को निर्देश दिया गया कि वह खेल के संचालन के लिए एक अंतरिम व्यवस्था बनाए, जिसमें तदर्थ समिति का गठन भी शामिल हो। यह व्यवस्था तब तक जारी रहनी थी, जब तक महासंघ में नियमों के अनुरूप शासन और प्रशासनिक ढांचा बहाल नहीं हो जाता।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार करते हुए यह अदालत प्रथम दृष्टया संतुष्ट है कि विवादित आदेश मनमाना है।”
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही, IOA को कर्नाटक हाईकोर्ट में तदर्थ समिति से संबंधित कार्यवाही की पूरी पेपर बुक और उस मामले में पारित आदेश रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।
टेबल टेनिस महासंघ ने मान्यता निलंबित करने के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
महासंघ की ओर से पेश सीनियर वकील ने दलील दी कि संहिता में उन परिस्थितियों का स्पष्ट उल्लेख है, जिनमें किसी खेल महासंघ की मान्यता निलंबित की जा सकती है। उनके अनुसार, कारण बताओ नोटिस में लगाए गए आरोप इन निर्धारित आधारों के दायरे में नहीं आते।
महासंघ की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि संहिता के तहत मान्यता का निलंबन केवल एक अंतरिम उपाय के रूप में किया जा सकता है और वह भी तब तक, जब तक पूरी जांच पूरी न हो जाए।
महासंघ का कहना है कि इस मामले में ऐसी कोई जांच चल ही नहीं रही थी, इसलिए मान्यता निलंबित करने का फैसला उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
केंद्रीय मंत्रालय ने 30 जून को जारी कारण बताओ नोटिस में महासंघ के कामकाज को लेकर कई चिंताएं जताई थीं। इनमें कथित कुप्रबंधन, पदाधिकारियों के बीच समन्वय की कमी, पारदर्शिता संबंधी आवश्यकताओं का पालन नहीं करना और प्रशासनिक ढांचे में खामियां शामिल थीं।
नोटिस में एशियाई खेल 2026 के लिए चयन नीति प्रकाशित नहीं करने के कथित मामले का भी उल्लेख किया गया। इसके अलावा, खिलाड़ियों की शिकायतों के निवारण के लिए व्यवस्था नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए।
इन दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करें।
अदालत की प्रथम दृष्टया टिप्पणी के बावजूद, मामले में अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।

