जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हटने का मामला: केजरीवाल ने दायर किया नया हलफनामा, कहा- जज का बेटा और बेटी केंद्र के पैनल वकील

Shahadat

15 April 2026 10:03 AM IST

  • जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हटने का मामला: केजरीवाल ने दायर किया नया हलफनामा, कहा- जज का बेटा और बेटी केंद्र के पैनल वकील

    शराब नीति मामले की सुनवाई से दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग वाली अपनी याचिका में AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अतिरिक्त हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने कहा है कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी, दोनों ही केंद्र सरकार के वकील के तौर पर पैनल में शामिल हैं।

    केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा के बच्चों को काम सॉलिसिटर जनरल द्वारा सौंपा जाता है, जो जस्टिस शर्मा के सामने CBI की तरफ से पेश हुए। उनके अनुसार, इससे जस्टिस शर्मा की ओर से पक्षपात की एक उचित आशंका पैदा होती है, जिसके चलते शराब नीति मामले में आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका की सुनवाई से उनका हटना ज़रूरी हो जाता है।

    बता दें, 13 अप्रैल को जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों द्वारा दायर उन आवेदनों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिनमें शराब नीति मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली CBI की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई से उनके हटने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान, केजरीवाल ने खुद इस मामले पर बहस की थी। उन्होंने मौखिक रूप से कहा था कि सोशल मीडिया पर जस्टिस शर्मा के बच्चों के केंद्र सरकार के साथ पेशेवर जुड़ाव को लेकर चर्चा चल रही है।

    केजरीवाल ने कहा था कि स्थापित परंपराओं के अनुसार, अगर किसी जज के रिश्तेदारों का मामले में पेश होने वाले किसी भी पक्ष से कोई जुड़ाव होता है तो जज खुद को सुनवाई से अलग कर लेते हैं।

    सुनवाई खत्म होने के बाद केजरीवाल ने यह हलफनामा दायर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकील के तौर पर पैनल में शामिल हैं। जहां उनके बेटे सुप्रीम कोर्ट के लिए 'ग्रुप ए' पैनल वकील हैं, वहीं उनकी बेटी 'ग्रुप सी' पैनल वकील हैं। उन्होंने कानूनी रिपोर्टर सौरभ दास द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारियों का हवाला दिया।

    उन्होंने कानून और न्याय मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध एक FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवालों) के जवाब का भी ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया,

    "सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल अपने मामलों का चयन खुद करते हैं, जबकि अन्य मामले सॉलिसिटर जनरल द्वारा एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और पैनल वकीलों को सौंपे जाते हैं।"

    केजरीवाल ने कहा कि चूंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता CBI की तरफ से पेश होकर जस्टिस शर्मा के सामने उनके (केजरीवाल के) बरी होने का विरोध कर रहे हैं, इसलिए इससे हितों के टकराव की एक सीधी और गंभीर स्थिति पैदा होती है। उन्होंने दलील दी कि सॉलिसिटर जनरल को सुनवाई की पहली तारीख को ही इस जुड़ाव का खुलासा कर देना चाहिए था।

    उन्होंने कहा,

    "वही लॉ ऑफिसर और कानूनी संस्था, जो इस माननीय अदालत के सामने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही है, उसी संस्थागत तंत्र का भी हिस्सा है, जिसके ज़रिए केंद्र सरकार के मामले और सरकारी काम, मामले की सुनवाई कर रहे माननीय जज के करीबी परिवार के सदस्यों को आवंटित किए जाते हैं।"

    केजरीवाल ने आगे कहा कि जस्टिस शर्मा के बेटे को बड़ी संख्या में मामले आवंटित किए गए।

    केजरीवाल ने कहा,

    "मैं आगे यह भी कहता हूं कि सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध अतिरिक्त दस्तावेज़, जिनमें RTI सामग्री भी शामिल है, यह संकेत देते हैं कि एक लंबे समय तक माननीय जज के बेटे को केंद्र सरकार का काफी कानूनी काम आवंटित किया गया। उक्त सोशल मीडिया रिपोर्ट में बताए गए RTI जवाब में यह भी ज़िक्र किया गया कि वर्ष 2023 में माननीय जज के बेटे को कुल 2,487 मामले सौंपे गए, 2024 में 1784 मामले और 2025 में 1633 मामले।"

    हलफनामे में यह भी कहा गया कि "राजनीतिक संदर्भ" इस टकराव को और भी ज़्यादा बढ़ा देता है और आशंका को और भी गहरा कर देता है।

    केजरीवाल ने कहा कि इस तरह के राजनीतिक प्रकृति वाले आपराधिक मामले में, जहां अभियोजन एजेंसी CBI है, जहां केंद्र सरकार के सर्वोच्च लॉ ऑफिसर उनके खिलाफ पेश होते हैं, और जहां जज के करीबी परिवार के सदस्यों के पास केंद्र सरकार के पैनल में कई सक्रिय पद हैं और उन्हें उसी कानूनी संस्था और लॉ ऑफिसर के ज़रिए सरकारी काम मिलता है, वहां आशंका सीधी, गंभीर और नज़रअंदाज़ न की जा सकने वाली बन जाती है।

    हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी वास्तविक पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहे हैं, न ही वह अदालत पर कोई गलत इरादा होने का आरोप लगा रहे हैं, बल्कि वह केवल यह कह रहे हैं कि ये परिस्थितियाँ उनके मन में एक वास्तविक, वस्तुनिष्ठ और उचित आशंका पैदा करती हैं कि कार्यवाही में शायद वह पूर्ण न्यायिक निष्पक्षता, स्वतंत्रता और तटस्थता दिखाई न दे, जिसकी कानून अपेक्षा करता है।

    उन्होंने दलील दी,

    "इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूँ कि माननीय जज के समक्ष इस वर्तमान पुनरीक्षण याचिका का जारी रहना, विशेष रूप से इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में हितों के टकराव का तत्काल और प्रत्यक्ष आभास पैदा करेगा। न्याय के हित में यही सबसे अच्छा होगा कि इस मामले की आगे सुनवाई माननीय जज द्वारा न की जाए।"

    केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्हें CBI की दलीलों का जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

    उन्होंने कहा,

    "मैं कहता हूं कि CBI की ओर से दलीलें शाम 6:15 बजे के बाद तक जारी रहीं। सामान्य क्रम में, और विशेष रूप से चूंकि मैं स्वयं (party-in-person) के रूप में पेश हो रहा था तो मेरे लिए यह उम्मीद करना उचित था कि मुझे इसके बाद तैयारी करने और जवाबी दलीलें पेश करने के लिए कुछ उचित समय [भले ही वह अगले दिन ही क्यों न हो] और अवसर दिया जाएगा—विशेषकर इतने गंभीर मामले में, जिसमें कई तथ्यात्मक और कानूनी मुद्दों पर आधारित 'रिक्यूज़ल' (सुनवाई से हटने) की याचिका शामिल है। हालांकि, इस माननीय न्यायालय द्वारा कार्यवाही शाम 7:00 बजे के बाद तक जारी रखी गई और उसी दिन समाप्त कर दी गई; जिसका परिणाम यह हुआ कि मुझे जवाबी दलीलें तैयार करने और पेश करने का कोई भी निष्पक्ष और उचित अवसर प्रभावी रूप से नहीं मिला। मैं माननीय न्यायालय से अनुरोध करता हूं कि मुझे मौखिक सुनवाई में वर्तमान तथ्यों को प्रस्तुत करने के लिए समय दिया जाए। किसी भी स्थिति में मैं माननीय न्यायालय से अनुरोध करता हूं कि इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लिया जाए और उन पर विचार किया जाए, क्योंकि मेरे विनम्र निवेदन के अनुसार, ये तथ्य अपने आप में हितों के प्रत्यक्ष टकराव और 'रिक्यूज़ल' के आधार का निर्माण करते हैं।"

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