आजीविका और निवासियों का शांति से रहने का अधिकार साथ-साथ चलने चाहिए: हाईकोर्ट ने शालीमार बाग साप्ताहिक बाज़ार को दूसरी जगह शिफ्ट करने का आदेश दिया

Shahadat

29 July 2026 10:04 AM IST

  • आजीविका और निवासियों का शांति से रहने का अधिकार साथ-साथ चलने चाहिए: हाईकोर्ट ने शालीमार बाग साप्ताहिक बाज़ार को दूसरी जगह शिफ्ट करने का आदेश दिया

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को शालीमार बाग के BH ब्लॉक में लगने वाले सोमवार के साप्ताहिक बाज़ार को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि हालांकि सड़क किनारे सामान बेचने वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) को आजीविका का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार निवासियों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए, ताकि उन्हें भारी भीड़ और परेशानी का सामना न करना पड़े।

    जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की बेंच ने बाज़ार को 'केला ​​गोदाम रोड' पर शिफ्ट करने के MCD का प्रस्ताव स्वीकार किया। कोर्ट ने माना कि नई जगह पर 300 अधिकृत वेंडर्स के लिए पर्याप्त जगह होगी और इससे न तो ट्रैफिक जाम होगा और न ही निवासियों के आने-जाने में कोई रुकावट आएगी।

    कोर्ट ने कहा,

    "सड़क किनारे सामान बेचने वालों (खासकर साप्ताहिक बाज़ार चलाने वालों) के लिए जगह बनाने के चक्कर में किसी भी निवासी को इतनी ज़्यादा परेशानी नहीं होनी चाहिए।"

    यह याचिका शालीमार बाग के अलग-अलग ब्लॉक की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने दायर की थी। उन्होंने साप्ताहिक बाज़ार को हटाने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि अनधिकृत वेंडर्स ने इलाके पर कब्ज़ा कर लिया, जिससे भारी ट्रैफिक जाम होता है, पैदल चलने वालों को दिक्कत होती है और इमरजेंसी सेवाओं में देरी होती है।

    MCD ने कोर्ट को बताया कि जांच में 'साप्ताहिक बाज़ार नीति' के कई उल्लंघन पाए गए, जैसे तय साइज़ से बड़े स्टॉल लगाना, अस्थायी बाज़ार को अर्ध-स्थायी बाज़ार में बदलना, सड़क के हिस्से पर कब्ज़ा करना और प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करना।

    हाईकोर्ट ने गौर किया कि पहले बाज़ार को सख्त शर्तों के साथ जारी रखने की इजाज़त दी गई, लेकिन इसके बावजूद अनधिकृत वेंडर्स की संख्या बढ़ गई और अधिकारी पाबंदियों को लागू करने में नाकाम रहे।

    कोर्ट ने कहा,

    "हो सकता है कि 300 अधिकृत वेंडर्स हों, लेकिन अनधिकृत वेंडर्स की संख्या उनसे तीन गुना ज़्यादा है... इमरजेंसी गाड़ियों, स्कूल बसों और फायर सर्विस की गाड़ियों का आना-जाना और कॉलोनी में आसानी से प्रवेश और निकास बुनियादी ज़रूरतें हैं, जिन्हें कोर्ट नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।"

    साप्ताहिक बाज़ारों के लिए MCD की नीति का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे बाज़ार सड़कों को ब्लॉक नहीं कर सकते या इमारतों तक पहुँचने में रुकावट नहीं डाल सकते, और जहाँ वे भारी ट्रैफिक जाम पैदा करते हैं, वहाँ से उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।

    आगे कहा गया,

    "एक तरफ़ निवासियों के शांति से रहने के अधिकार और दूसरी तरफ़ अधिकृत स्ट्रीट वेंडर्स के अपना सामान बेचने के अधिकार के बीच संतुलन बनाने के लिए - ताकि निवासियों को कोई परेशानी न हो - कोर्ट ने MCD की सुझाई गई जगह को मंज़ूरी दी। साथ ही कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह 300 अधिकृत वेंडर्स की सूची तैयार और सत्यापित करे, KYC वेरिफिकेशन करे, नई जगह पर वेंडिंग के लिए तय 6x4 फ़ीट की जगह आवंटित करे और यह सुनिश्चित करे कि कोई अतिक्रमण या ट्रैफ़िक में रुकावट न हो।"

    इसके अलावा, कोर्ट ने रोज़ाना की वेंडिंग फ़ीस को ₹15 से बढ़ाकर ₹1,000 कर दिया (जिसे बाद में टाउन वेंडिंग कमिटी बदल सकती है) और स्थानीय SHO को निर्देश दिया कि वे नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण करें।

    Case title: RWA v. MCD

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