नशे में धुत दोस्तों के बीच अचानक हुई लड़ाई में ईंट से बार-बार वार करने पर हत्या का आरोप नहीं लगेगा: दिल्ली हाईकोर्ट
Shahadat
23 May 2026 8:12 PM IST

शराब के पैसे देने को लेकर दो दोस्तों के बीच हुई नशे वाली कहा-सुनी से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या की सज़ा को 'गैर-इरादतन हत्या' (culpable homicide not amounting to murder) में बदल दिया। कोर्ट ने माना कि यह घटना अचानक गुस्से में हुई थी और इसके पीछे कोई पहले से सोची-समझी योजना नहीं थी।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत नहीं, बल्कि धारा 304 (भाग II) के तहत आएगा। कोर्ट ने कहा कि भले ही आरोपी को इस बात का पता था कि उसके इस काम से किसी की जान जा सकती है, लेकिन उसका इरादा हत्या करने का नहीं था।
सरकारी वकील का पक्ष यह था कि आरोपी और मृतक आपस में दोस्त थे। उन्होंने साथ बैठकर शराब पी थी और शराब के पैसे देने को लेकर उनके बीच झगड़ा हो गया। इस झगड़े के दौरान, आरोपी ने कथित तौर पर मृतक पर ईंट से बार-बार हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।
हालात का जायज़ा लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि क्या आरोपी ने मृतक की जान ली, बल्कि यह है कि क्या उसने ऐसा IPC की धारा 300 के तहत हत्या माने जाने के लिए ज़रूरी इरादे के साथ किया था।
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि उनके बीच पहले से कोई दुश्मनी नहीं थी और न ही हत्या करने की कोई पहले से सोची-समझी योजना थी। कोर्ट ने आगे कहा कि दोनों ही लोग नशे में थे और यह घटना झगड़े के दौरान अचानक हुई।
कोर्ट ने कहा,
"हत्या करने का कोई मकसद नहीं था। कानूनी नज़रिए से देखें तो जान लेने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन आरोपी को इस बात का पता था कि किसी व्यक्ति के सिर पर ईंट से बार-बार वार करने से उसकी जान जा सकती है।"
कोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले के हालात पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'सुदाम प्रभाकर अचात बनाम महाराष्ट्र सरकार' (2025) मामले में तय किए गए सिद्धांत के दायरे में आते हैं। इस सिद्धांत के अनुसार, जब कोई हमला अचानक और बिना किसी पूर्व-योजना के होता है। दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई दुश्मनी नहीं होती, तो आरोपी पर हत्या जैसा गंभीर आपराधिक इरादा थोपना सही नहीं होगा।
कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि घटना के दौरान आरोपी को भी चोटें आई थीं और झगड़ा तब और बढ़ गया जब शराब पीने के दौरान मृतक ने आरोपी को थप्पड़ मार दिया था।
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस मामले के तथ्यों के आधार पर वह थप्पड़ ही अचानक और गंभीर उकसावे (grave and sudden provocation) की वजह बना। तदनुसार, न्यायालय ने दोषसिद्धि को IPC की धारा 302 से बदलकर IPC की धारा 304 भाग II कर दिया और सज़ा को आजीवन कारावास से घटाकर आठ वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया।
Case title: Sanjay Singh v. State

