कैदियों को अनुशासित करने के नाम पर पैरोल और फरलो जैसी सुधारात्मक सुविधाएं खत्म नहीं कर सकती राज्य सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट

  • कैदियों को अनुशासित करने के नाम पर पैरोल और फरलो जैसी सुधारात्मक सुविधाएं खत्म नहीं कर सकती राज्य सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि जेलों में अनुशासन के नाम पर कैदियों के सुधार से जुड़े अधिकार जैसे पैरोल और फरलो छीने नहीं जा सकते।

    जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि सरकार का कैदियों की फरलो संबंधी अधिसूचना को वापस लेना एक "गलत और पीछे ले जाने वाला कदम" है। अदालत ने साफ किया कि पैरोल और फरलो का मकसद कैदियों को सुधार का मौका देना है, न कि केवल जेल अनुशासन लागू करना।

    यह मामला एक कैदी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। कैदी का फरलो आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि वह तीन दिन देरी से जेल लौटा था। कैदी ने कहा कि उसे आंख में चोट लगी थी और इलाज के चलते देरी हुई, जिसकी जानकारी जेल प्रशासन को भी थी।

    जेल अधिकारियों ने कहा कि कैदी को चेतावनी की सजा दी गई थी और वह एक साल बाद ही नया फरलो मांग सकता है। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि अगर आत्मसमर्पण में सिर्फ एक-दो दिन की देरी हुई हो और कोई गंभीर कारण न हो, तो इसे कैदी के खिलाफ नहीं गिनना चाहिए।

    अदालत ने फरलो आवेदन खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और मामले को दोबारा विचार के लिए जेल प्राधिकरण को भेज दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story