IAF विमान में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड RTI के दायरे से बाहर: दिल्ली हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द किया
Shahadat
20 Oct 2026 11:26 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान में भारत के प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े 'स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स' (SFR-II) के विवरण को 'सूचना का अधिकार' अधिनियम (RTI Act) के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, यदि ऐसा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो या प्रधानमंत्री के जीवन और शारीरिक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो।
जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि केवल सुरक्षा कर्मियों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी को हटा देने से, इन रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने से पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिम खत्म नहीं हो जाएंगे।
कोर्ट ने कहा,
"सिर्फ इसलिए कि माननीय प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ है, यह इस बात का आधार नहीं बन सकता कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाए, जिससे इन यात्राओं के लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था को खतरा हो सकता है।"
कोर्ट, भारतीय वायु सेना के एयर हेडक्वार्टर के 'डायरेक्टोरेट ऑफ पर्सनल सर्विसेज' के 'सेंट्रल पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर' (CPIO) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के जुलाई 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आयोग ने उपलब्ध और प्रासंगिक SFR-II रिकॉर्ड्स की प्रमाणित प्रतियां देने का निर्देश दिया।
ये रिकॉर्ड्स रिटायर कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने मांगे थे। उन्होंने RTI आवेदन दायर करके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 अप्रैल 2013 से 5 जून 2018 के बीच भारतीय वायु सेना के विमानों से की गई विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी मांगी थी।
वायु सेना ने RTI Act की धारा 8(1)(a) और 8(1)(e) के तहत मिलने वाली छूट का हवाला देते हुए SFR रिकॉर्ड्स देने से इनकार किया था। इसके बाद वायु सेना ने CIC के इस निर्देश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट के समक्ष वायु सेना ने तर्क दिया कि इन रिकॉर्ड्स में संवेदनशील विवरण शामिल हैं, जिनमें यात्रियों की जानकारी, विमान और एयरक्रू का विवरण, फ्लाइट रेफरेंस, यात्रियों की संख्या, संबंधित एजेंसियों की जानकारी और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात कर्मियों से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। इसमें तर्क दिया गया कि भले ही सुरक्षा कर्मियों के नाम हटा दिए जाएं। फिर भी बाकी जानकारी को पब्लिक डोमेन में मौजूद सूचनाओं से जोड़कर प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था के कुछ पहलुओं का पता लगाया जा सकता है और सुरक्षा तैनाती के तरीकों को समझा जा सकता है।
दूसरी ओर, बत्रा ने तर्क दिया कि यह जानकारी सार्वजनिक धन से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च से जुड़ी है, इसलिए यह जनहित का एक महत्वपूर्ण मामला है।
उन्होंने कहा कि उन्हें सुरक्षा कर्मियों की पहचान जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बल्कि वे उन निजी व्यक्तियों के बारे में जानना चाहते हैं, जो सरकारी खर्च पर प्रधानमंत्री के साथ यात्रा करते हैं।
15 अक्टूबर को दिए गए आदेश में अदालत ने कहा कि सूचना का अधिकार असीमित नहीं है। इसे अन्य जनहितों के साथ संतुलित करना जरूरी है, जिसमें संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना भी शामिल है।
अदालत ने आगे कहा कि किसी विशेष जानकारी को सार्वजनिक करने से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है या प्रधानमंत्री के जीवन और शारीरिक सुरक्षा को जोखिम हो सकता है—इस बात का आकलन करने का काम सक्षम सुरक्षा एजेंसियों का है, न कि अदालत का।
अदालत ने कहा,
"इस तरह का आकलन मुख्य रूप से उन एजेंसियों के दायरे में आता है, जिन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।"
अदालत ने यह भी कहा कि इस जानकारी को सार्वजनिक करने के पक्ष में कोई ठोस जनहित साबित नहीं किया गया।
'सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि धारा 8(1)(a) और 8(1)(g) उन छूटों की श्रेणी में आती हैं, जिनके तहत केवल 'बड़े जनहित' के आधार पर भी जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि SFR-II रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने का निर्देश देकर CIC ने गलती की थी।
अदालत ने कहा,
"याचिकाकर्ता ने RTI Act की धारा 8(1)(a) और 8(1)(g) के तहत मिली छूट का इस्तेमाल करके जानकारी देने से इनकार किया, जो पूरी तरह उचित था। ऐसा इसलिए है, क्योंकि, जैसा कि याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से बताया है, इस जानकारी को सार्वजनिक करने से राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री के जीवन तथा शारीरिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।"
इसके अनुसार, अदालत ने वायु सेना की याचिका स्वीकार की और CIC का आदेश रद्द किया।
Case Title : THE CENTRAL PUBLIC INFORMATION OFFICER DIRECTORATE OF PERSONAL SERVICES AIR HEADQUARTERS INDIAN AIR FORCE v. COMMODORE LOKESH K BATRA RETD

