जलता पुतला फेंककर भाग जाना लोकतांत्रिक विरोध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों को राहत देने से किया इनकार

Amir Ahmad

19 May 2026 12:14 PM IST

  • जलता पुतला फेंककर भाग जाना लोकतांत्रिक विरोध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों को राहत देने से किया इनकार

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक प्रमुख राजनीतिक नेता के सरकारी बंगले पर जलता हुआ पुतला फेंकने के आरोपी लोगों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं की जा सकती।

    जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि पुतले को आग लगाकर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी वाले परिसर की ओर फेंकना और फिर भाग जाना किसी भी तरह से लोकतांत्रिक विरोध नहीं कहा जा सकता।

    अदालत ने कहा,

    “लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा किसी भी लोकतांत्रिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं हो सकती। ऐसे 'मारो और भागो' जैसे कृत्य विरोध प्रदर्शन नहीं कहलाते। यह गंभीर चिंता का विषय है कि समाज का एक वर्ग आज विरोध के नाम पर ऐसी विघटनकारी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।”

    हाईकोर्ट उन आरोपियों की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें हत्या के प्रयास और आगजनी समेत विभिन्न धाराओं से मुक्त करने से इनकार कर दिया गया।

    FIR के मुताबिक 21 जून 2022 को आरोपी मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित एक सरकारी बंगले के बाहर एकत्र हुए, नारेबाजी की और सड़क पर पुतला जलाया। इसके बाद आरोपियों ने जलते हुए पुतले को डंडों के सहारे उठाकर बंगले के गेट और सुरक्षा कक्ष की छत की ओर फेंक दिया।

    अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और आरोपपत्र में शामिल सीसीटीवी फुटेज पर भरोसा किया।

    अदालत ने यह दलील खारिज की कि यह केवल प्रतीकात्मक विरोध था। हाइकोर्ट ने कहा कि आरोपी मुख्य सड़क, चौड़ा फुटपाथ और सर्विस रोड पार करके सुरक्षा कक्ष की ओर जलता पुतला फेंकने पहुंचे थे।

    अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज इस तर्क को “पूरी तरह ध्वस्त” कर देता है कि यह केवल सांकेतिक प्रदर्शन था।

    हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कृत्य अत्यंत खतरनाक हो तो केवल इस वजह से हत्या के प्रयास का आरोप खत्म नहीं हो सकता कि किसी को चोट नहीं आई।

    अदालत ने कहा,

    “आरोपी इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते कि गेट के भीतर मौजूद सुरक्षाकर्मियों की दिशा में जलता हुआ पुतला फेंकना इतना खतरनाक कार्य था कि इससे मृत्यु होने की पूरी संभावना थी। यह अलग बात है कि सौभाग्य से सुरक्षाकर्मी सुरक्षित बच गए।”

    हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि FIR में स्पष्ट आरोप है कि आरोपियों ने सुरक्षा कर्मियों की हत्या की कोशिश की।

    हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी ये टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम परिणाम को प्रभावित नहीं करेंगी और ट्रायल कोर्ट सबूतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला करेगा।

    याचिका को पूरी तरह निरर्थक बताते हुए हाईकोर्ट ने इसे खारिज किया और आरोपियों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि एक सप्ताह के भीतर “भारत के वीर” कोष में जमा कराई जाए।

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