क्या जांच कर रहे हैं हमें नहीं पता, लेकिन कानून की प्रक्रिया का पालन करें: कथित अवैध हिरासत मामले में दिल्ली हाइकोर्ट की पुलिस को नसीहत
Amir Ahmad
16 March 2026 4:22 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने कथित अवैध हिरासत के आरोप लगाने वाले 10 एक्टिविस्ट से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की नसीहत दी। अदालत ने कहा कि पुलिस क्या जांच कर रही है, यह अदालत को भले न पता हो लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ कार्यकर्ता रुद्र विक्रम के परिजनों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट जसदीप ढिल्लों ने अदालत को बताया कि पुलिस ने पहले कहा कि सभी लोगों को 14 मार्च को रिहा कर दिया गया लेकिन रुद्र विक्रम को अदालत में सुनवाई होने के बाद ही रिहा किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुद्र को हिरासत के दौरान प्रताड़ित किया गया और उसके शरीर पर चोट के निशान हैं। वकील ने कहा कि उसे हाथों चेहरे और निजी अंगों पर मारा गया। उन्होंने रुद्र की मेडिकल जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की।
हालांकि, खंडपीठ ने मेडिकल बोर्ड गठित करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि रुद्र चाहें तो स्वयं अपनी मेडिकल जांच करवा सकते हैं।
अदालत ने कहा,
“मेडिकल बोर्ड की जरूरत नहीं है। आप खुद जांच करा सकते हैं।”
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि जांच के लिए सभी लोगों को आज (सोमवार) उपस्थित रहने के लिए कहा गया था लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए।
इस पर अदालत ने कहा,
“आपके पास अधिकार हैं। हम तो सिर्फ इतना कह रहे हैं कि हमें यह भी नहीं पता कि आप किस चीज की जांच कर रहे हैं। बस इतना चाहते हैं कि कानून में जो प्रक्रिया निर्धारित है, उसका पालन किया जाए।”
अदालत ने संबंधित क्षेत्रों की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी, जब अन्य बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं के साथ इस मामले पर भी सुनवाई की जाएगी।
इससे एक दिन पहले हाइकोर्ट ने विशेष रविवार बैठक कर दिल्ली पुलिस से यह बताने को कहा था कि इन लोगों को किस आधार और किस कानूनी अधिकार के तहत हिरासत में रखा गया।

