[POCSO Act] वैलेंटाइन डे पर लड़की का लड़के से दोस्ताना होना, ज़बरदस्ती सेक्स का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
Shahadat
21 March 2026 7:11 PM IST
![[POCSO Act] वैलेंटाइन डे पर लड़की का लड़के से दोस्ताना होना, ज़बरदस्ती सेक्स का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट [POCSO Act] वैलेंटाइन डे पर लड़की का लड़के से दोस्ताना होना, ज़बरदस्ती सेक्स का लाइसेंस नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/11/14/750x450_630971-pocso.jpg)
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO Act के तहत दर्ज मामले में आरोपी को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि वैलेंटाइन डे पर किसी लड़की का किसी लड़के से दोस्ताना होना, उसके साथ ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं है।
जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि लड़की की सहमति से भी उसके सिर पर सिंदूर लगाना सही नहीं ठहराया जा सकता, भले ही कानून में इसे कोई अपराध न माना गया हो।
कोर्ट ने कहा,
"सिर्फ़ इसलिए कि कोई लड़की किसी लड़के से दोस्ताना है और वह दिन वैलेंटाइन डे है, इसका मतलब यह नहीं है कि लड़के को उसके साथ ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस मिल गया। लड़की की सहमति के बिना उसकी मांग में सिंदूर भरना भी सही नहीं ठहराया जा सकता, भले ही कानून में इसे कोई अपराध न माना गया हो।"
जज BNS की धारा 64(1) और 137(2) और POCSO Act की धारा 4 के तहत दर्ज मामले में दायर ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, FIR 17 साल की एक लड़की के बयान पर दर्ज की गई। लड़की ने आरोप लगाया कि वह आरोपी को करीब एक साल से जानती थी। 14 फरवरी, 2025 को आरोपी ने कथित तौर पर किसी बहाने से उसे एक घर में बुलाया, उसकी मांग में सिंदूर भरा और उसके विरोध के बावजूद उसके साथ ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाए। इस घटना के बाद उसके भाई ने पुलिस को सूचना दी और लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया गया।
आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि पीड़ित लड़की की उम्र 18 साल से ज़्यादा थी और उसने अपनी मर्ज़ी से संबंध बनाए। यह भी तर्क दिया गया कि यह घटना वैलेंटाइन डे पर हुई थी, जिससे इसमें एक रोमांटिक पहलू होने का संकेत मिलता है।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पीड़ित लड़की और उसके भाई ने ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष का समर्थन किया और पीड़ित लड़की खुद ज़मानत का विरोध करने के लिए कोर्ट में पेश हुई।
यह तर्क दिया गया कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार लड़की की जन्मतिथि 14 जनवरी, 2008 थी, जिससे वह नाबालिग साबित होती है। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि पीड़ित लड़की के वजाइनल स्वैब में आरोपी का DNA मिला था। ज़मानत याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज कराते समय और ट्रायल के दौरान अपनी गवाही में अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन करते समय अभियोजिका ने जो रुख अपनाया था। उसके बाद ज़मानत याचिका का विरोध करने के लिए उसकी मौजूदगी से यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि कथित घटना उसकी मर्ज़ी के खिलाफ हुई।
जज ने कहा,
“ऊपर बताई गई परिस्थितियों को देखते हुए मुझे इस चरण पर आरोपी/आवेदक को ज़मानत देने के लिए यह एक उचित मामला नहीं लगता। इसलिए ज़मानत याचिका के साथ-साथ लंबित याचिका को भी खारिज किया जाता है।”
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस आदेश में कही गई किसी भी बात को ट्रायल के अंतिम चरण में किसी भी पक्ष के खिलाफ नहीं माना जाएगा।
Title: WASIM AKHTAR v. STATE (GNCT OF DELHI)

